डेस्क : कटिहार के बरारी प्रखंड से बाढ़ राहत राशि को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। दक्षिणी भंडारतल पंचायत के वार्ड नंबर-2 की कुछ बाढ़ पीड़ित महिलाओं और लाभुकों ने आरोप लगाया है कि जीआर (Gratuitous Relief) सूची में नाम जोड़ने और राहत राशि दिलाने के नाम पर उनसे 1 से 2 हजार रुपये तक की मांग की जा रही है।
बाढ़ प्रभावित बरारी में राहत व्यवस्था को लेकर पहले भी ग्रामीणों की शिकायतें सामने आती रही हैं। प्रशासन की ओर से राहत कार्यों की निगरानी भी की जा रही है।
खाते में राशि आने के बाद भी पैसे मांगने का आरोप
लाभुकों में से एक महिला ने आरोप लगाया कि उसके खाते में जीआर की राशि आने के बाद भी उससे करीब 1,500 रुपये की मांग की गई। वहीं, अन्य लाभुकों ने भी सूची में नाम जोड़ने या राहत राशि दिलाने के नाम पर पैसे मांगे जाने का दावा किया है।
हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि अभी नहीं हुई है। मामले में प्रशासनिक जांच के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
सीओ ने कहा- जीआर राशि के लिए कोई शुल्क नहीं
मामले को लेकर बरारी के अंचलाधिकारी मनीष कुमार ने स्पष्ट किया है कि जीआर सूची में नाम जोड़ने या राहत राशि दिलाने के लिए किसी भी तरह का शुल्क निर्धारित नहीं है।
उन्होंने बाढ़ पीड़ितों से अपील की है कि यदि कोई व्यक्ति, जनप्रतिनिधि या सरकारी कर्मी राहत राशि या सूची में नाम जोड़ने के बदले पैसे की मांग करता है तो उसे पैसा न दें।
शिकायत मिलने पर होगी जांच
सीओ ने लोगों से ऐसे मामलों की शिकायत लिखित रूप से करने की अपील की है। उनका कहना है कि शिकायत मिलने पर मामले की जांच कराई जाएगी और आरोप सही पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
ऐसे में अब सवाल यह है कि दक्षिणी भंडारतल पंचायत में जीआर राशि को लेकर लगाए गए आरोपों की वास्तविकता क्या है और क्या किसी स्तर पर लाभुकों से पैसे की मांग की गई? प्रशासनिक जांच के बाद ही इसकी पूरी तस्वीर सामने आएगी।
बाढ़ से पहले से प्रभावित है बरारी क्षेत्र
इस मानसून में कटिहार का बरारी प्रखंड बाढ़ से बुरी तरह प्रभावित रहा है। गंगा और कोसी के जलस्तर बढ़ने से प्रखंड के कई गांवों में पानी घुसा था। प्रशासन की ओर से प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक रसोई, पॉलीथिन शीट और अन्य राहत व्यवस्था शुरू की गई थी।
ऐसे में बाढ़ पीड़ितों को मिलने वाली सरकारी राहत राशि से जुड़ी किसी भी शिकायत को गंभीरता से देखना जरूरी है। अब नजर प्रशासन की जांच और आगे की कार्रवाई पर है।







