पटना : शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर आज मां दुर्गा की उपासना और विजयादशमी को लेकर देशभर में धार्मिक उत्साह का माहौल है। श्रद्धालु मां दुर्गा की पूजा-अर्चना कर परिवार की सुख-समृद्धि, शांति और खुशहाली की कामना कर रहे हैं। दुर्गा पूजा के अवसर पर पूजा पंडालों और मंदिरों में भक्तों की भीड़ जुटने की उम्मीद है। हालांकि, महानवमी और विजयादशमी की तिथि स्थानीय पंचांग और पूजा परंपराओं के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।
महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा
नवरात्र के नौवें दिन मां दुर्गा के नौवें स्वरूप मां सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, मां सिद्धिदात्री भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण करने और उन्हें सिद्धियां प्रदान करने वाली देवी हैं। इस दिन श्रद्धालु विधि-विधान से पूजा करते हैं और परिवार की सुख-शांति के लिए प्रार्थना करते हैं।
महानवमी के अवसर पर कई घरों और मंदिरों में हवन, कन्या पूजन तथा भंडारे का आयोजन किया जाता है। श्रद्धालु छोटी कन्याओं को देवी का स्वरूप मानकर उनकी पूजा करते हैं और उन्हें भोजन तथा उपहार भेंट करते हैं। नवरात्र में व्रत रखने वाले कई भक्त महानवमी पर पूजा-अर्चना के बाद अपना व्रत खोलते हैं। हालांकि, व्रत पारण का समय स्थानीय पंचांग के अनुसार निर्धारित किया जाता है।
विजयादशमी पर बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश
विजयादशमी का पर्व बुराई पर अच्छाई और अधर्म पर धर्म की विजय का प्रतीक माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां दुर्गा ने महिषासुर का वध कर संसार को उसके अत्याचारों से मुक्ति दिलाई थी। वहीं, रामायण की परंपरा में विजयादशमी को भगवान श्रीराम की रावण पर विजय से जोड़कर देखा जाता है।
इस अवसर पर देश के अनेक हिस्सों में रावण, कुंभकर्ण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया जाता है। रामलीला के मंचन के जरिए भगवान श्रीराम के जीवन और आदर्शों को प्रस्तुत किया जाता है। यह पर्व लोगों को सत्य, न्याय, साहस और धर्म के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है।
बिहार में दुर्गा पूजा को लेकर उत्साह
बिहार में दुर्गा पूजा के दौरान पटना, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, गया, दरभंगा, सहरसा और अन्य शहरों में श्रद्धालुओं के बीच खास उत्साह देखने को मिलता है। आकर्षक पूजा पंडाल, सजे मंदिर और देवी दुर्गा की भव्य प्रतिमाएं पर्व की रौनक बढ़ाती हैं। पूजा समितियां श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए विभिन्न व्यवस्थाएं करती हैं।
पूजा पंडालों में दर्शन के लिए जाने वाले लोगों को भीड़ के दौरान सावधानी बरतने, यातायात नियमों का पालन करने और प्रशासन की ओर से जारी निर्देशों का ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
पर्व देता है एकता और सद्भाव का संदेश
महानवमी और विजयादशमी केवल धार्मिक अनुष्ठानों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ये पर्व समाज में एकता, सद्भाव और सकारात्मकता का संदेश भी देते हैं। मां दुर्गा की आराधना शक्ति, साहस और नारी सम्मान की प्रेरणा देती है, जबकि दशहरा सत्य और न्याय की जीत का प्रतीक है।
इस प्रकार, 20 अक्टूबर को महानवमी और विजयादशमी मनाने वाले श्रद्धालुओं के लिए यह दिन भक्ति, आस्था और उत्सव का अवसर है। पूजा-पाठ और धार्मिक आयोजनों के बीच यह पर्व लोगों को बुराइयों का त्याग कर अच्छे विचारों और आदर्शों को अपनाने की प्रेरणा देता है।
प्रकाशन से पहले जरूरी तथ्य-जांच: 20 अक्टूबर 2026 को महानवमी और विजयादशमी दोनों होने की पुष्टि स्थानीय पंचांग से कर लें। दोनों तिथियां हर साल एक ही दिन नहीं पड़तीं; इसलिए बिहार के लिए प्रकाशित करते समय तिथि और पूजा के मुहूर्त की पुष्टि आवश्यक है।







