पटना : बिहार में वर्ष 2030 तक सतत विकास लक्ष्यों (Sustainable Development Goals–SDGs) को हासिल करने के लिए राज्य सरकार ने विभागीय समन्वय और निगरानी को मजबूत करने की पहल तेज कर दी है। इसी कड़ी में योजना एवं विकास विभाग की ओर से यूनिसेफ के तकनीकी सहयोग से SDG नोडल पदाधिकारियों के लिए एक दिवसीय क्षमता संवर्धन कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने कहा कि SDG लक्ष्यों की प्राप्ति में राज्य के प्रत्येक विभाग की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यशाला का शुभारंभ योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी और सचिव श्री कॅवल तनुज ने किया। इसका मुख्य उद्देश्य सतत विकास लक्ष्यों को हासिल करने के लिए विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना तथा राज्य संकेतक रूपरेखा (State Indicator Framework-SIF) की समीक्षा और उसे अद्यतन करना था।
सफल योजनाओं की स्टोरी तैयार कर विभाग करें साझा
कार्यशाला को संबोधित करते हुए अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी ने निर्देश दिया कि जिन संकेतकों (Indicators) में सकारात्मक प्रगति और बेहतर वृद्धि दर्ज की जा रही है, उनसे संबंधित विभाग अपनी सफलता की कहानियां (Success Stories) तैयार करें। इन कहानियों को नीति आयोग (NITI Aayog) के साथ साझा किया जाएगा, ताकि बिहार में हो रहे विकास कार्यों और उपलब्धियों को राष्ट्रीय स्तर पर प्रस्तुत किया जा सके।
उन्होंने कहा कि वर्ष 2030 तक निर्धारित SDG लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए सभी विभागों को अपनी जिम्मेदारियों का प्रभावी ढंग से निर्वहन करना होगा।
SDG-14 में मत्स्यपालन से जुड़े संकेतक शामिल करने पर जोर
अपर मुख्य सचिव ने बिहार की अंतर्देशीय मत्स्यपालन (Inland Fisheries) के क्षेत्र में राष्ट्रीय स्तर पर बेहतर स्थिति का उल्लेख करते हुए SDG-14 (Life Below Water) से संबंधित उपयुक्त संकेतकों को भी राज्य संकेतक रूपरेखा में शामिल करने की संभावना पर विचार करने का सुझाव दिया।
इससे राज्य की उपलब्धियों को सतत विकास लक्ष्यों के अनुरूप बेहतर तरीके से मापने और प्रदर्शित करने में मदद मिल सकती है।
राज्य संकेतक रूपरेखा की हुई समीक्षा
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में विभिन्न विभागों के संकेतकों की प्रासंगिकता, मापनीयता और डेटा की उपलब्धता पर विस्तार से चर्चा की गई। इस दौरान जरूरत के अनुसार नए संकेतक जोड़ने, मौजूदा संकेतकों में संशोधन करने और अनुपयोगी संकेतकों को हटाने को लेकर विभागीय पदाधिकारियों से सुझाव लिए गए।
कार्यशाला में विभिन्न विभागों के SDG नोडल पदाधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी की। वहीं, यूनिसेफ की टीम ने तकनीकी सहयोग और विशेषज्ञ सुझाव उपलब्ध कराए।
कार्यशाला का समापन सभी विभागों से प्राप्त सुझावों के आधार पर समयबद्ध कार्रवाई करने और SDG लक्ष्यों की दिशा में हुई प्रगति का नियमित अनुश्रवण सुनिश्चित करने के संकल्प के साथ हुआ।
