मिली जानकारी के अनुसार, इन कर्मचारियों की बहाली अवधेश नारायण सिंह के कार्यकाल के दौरान हुई थी। बताया जा रहा है कि पिछले दो से तीन महीने से ये सभी कर्मचारी विधान परिषद में अपनी सेवाएं दे रहे थे। हालांकि, सोमवार को अचानक इन्हें कार्यालय में जाने से रोक दिया गया।
अचानक प्रवेश पर लगी रोक
कर्मचारियों को कार्यालय में प्रवेश से रोके जाने के बाद विधान परिषद परिसर में बड़ी संख्या में कर्मचारी जमा हो गए। अचानक हुई इस कार्रवाई से कर्मचारियों के बीच असमंजस की स्थिति पैदा हो गई है। कर्मचारियों को किस आधार पर रोका गया है, इसे लेकर फिलहाल विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है।
विधान परिषद की सुरक्षा बढ़ाई गई
मामले की गंभीरता को देखते हुए विधान परिषद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था भी बढ़ा दी गई है। परिसर में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए सुरक्षा कर्मियों को सतर्क रखा गया है।
फिलहाल, नियुक्तियों में कथित गड़बड़ी और कर्मचारियों को प्रवेश से रोकने के मामले को लेकर स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार है। अब देखना होगा कि विधान परिषद प्रशासन इस संबंध में क्या आधिकारिक स्पष्टीकरण देता है और प्रभावित कर्मचारियों के भविष्य को लेकर क्या फैसला लिया जाता है।







