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यूपी बोर्ड: रटने के बजाय समझ, तर्क और विश्लेषण पर आधारित होंगे कक्षा 11-12 के प्रश्नपत्र

प्रयागराज, 10 अगस्त : राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 और राष्ट्रीय आकलन केंद्र (परख) के उद्देश्यों के अनुरूप उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद ने कक्षा 11 और 12 के विद्यार्थियों के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने की नई दिशा तय की है। यह जानकारी सोमवार को यूपी बोर्ड के सचिव भगवती सिंह ने दी।

उन्होंने बताया कि अब इतिहास, नागरिक शास्त्र, भूगोल और अर्थशास्त्र जैसे विषयों के प्रश्नपत्रों में केवल तथ्यों और स्मरण पर आधारित प्रश्नों के बजाय विद्यार्थियों की समझ, विश्लेषण, तार्किक क्षमता, समस्या समाधान और उच्च स्तरीय चिंतन को परखने वाले प्रश्नों को प्राथमिकता दी जाएगी।

उत्तर प्रदेश, प्रयागराज राज्य शिक्षा संस्थान की ओर से पहली बार प्रश्नपत्र निर्माताओं को इस संबंध में विशेष मार्गदर्शन दिया गया है। इसका उद्देश्य ऐसे प्रश्नपत्र तैयार करना है, जिनमें विद्यार्थियों को विषय को रटने के बजाय उसे समझने, तर्क करने, प्रमाण एवं स्रोतों का विश्लेषण करने, विभिन्न दृष्टिकोणों की तुलना करने तथा अपने विचारों को तर्क के साथ प्रस्तुत करने का अवसर मिले।

राज्य शिक्षा संस्थान के प्राचार्य की ओर से तैयार संतुलित प्रश्न-पत्र संग्रह की एक प्रति सोमवार को माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह को भेंट की गई। इस अवसर पर सचिव ने राज्य शिक्षा संस्थान की इस पहल की सराहना की।

माध्यमिक शिक्षा परिषद के सचिव भगवती सिंह ने कहा कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 के अनुरूप विद्यार्थियों के आकलन की पद्धति में बदलाव जरूरी है। प्रश्नपत्र ऐसे होने चाहिए, जो विद्यार्थियों की केवल याद रखने की क्षमता नहीं, बल्कि उनकी विषय-वस्तु की समझ, तार्किक सोच, विश्लेषण और समस्या समाधान की क्षमता को भी परखें।

उन्होंने कहा कि इस दिशा में राज्य शिक्षा संस्थान द्वारा तैयार किया गया संतुलित प्रश्न-पत्र संग्रह प्रश्नपत्र निर्माताओं के लिए उपयोगी मार्गदर्शक साबित होगा।

उन्होंने राज्य शिक्षा संस्थान, प्रयागराज की इस पहल के लिए आभार व्यक्त करते हुए कहा कि शिक्षा का उद्देश्य केवल परीक्षा पास करना नहीं, बल्कि विद्यार्थियों में समझ, तर्क और स्वतंत्र चिंतन की क्षमता विकसित करना है।

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