जम्मू, 10 अगस्त :देश के विभिन्न हिस्सों में जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करने के लिए गठित चार सदस्यीय सरकारी समिति सोमवार को तीन दिवसीय दौरे पर जम्मू पहुंची।
अधिकारियों ने बताया कि समिति के आगमन के तुरंत बाद जो अपने प्रवास के दौरान विभिन्न क्षेत्रों का विस्तृत आकलन करेगी मुख्य सचिव अटल दुल्लू और पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) नलिन प्रभात ने एक होटल में समिति से मुलाकात की। उन्होंने बताया कि यह बैठक समिति द्वारा वरिष्ठ अधिकारियों के साथ परामर्श का हिस्सा है जिसके तहत समिति अपने आकलन के लिए आवश्यक जानकारी जुटा रही है।
मई में केंद्र सरकार ने सेवानिवृत्त न्यायमूर्ति प्रकाश प्रभाकर नवलेकर की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन किया जिसका उद्देश्य अवैध आप्रवासन और अन्य असामान्य कारणों से उत्पन्न जनसांख्यिकीय परिवर्तनों का अध्ययन करना और इन परिवर्तनों के समाधान के उपाय सुझाना था।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले वर्ष 15 अगस्त को उच्च स्तरीय जनसांख्यिकी मिशन की घोषणा की थी जिसे केंद्रीय मंत्रिमंडल ने 11 सितंबर को मंजूरी दी थी। जनगणना आयुक्त के अलावा तीन प्रतिष्ठित विशेषज्ञ दुर्गा शंकर मिश्रा (सेवानिवृत्त आईएएस), बालाजी श्रीवास्तव (सेवानिवृत्त आईपीएस) और शमिका रवि – समिति के सदस्य हैं। गृह मंत्रालय के संयुक्त सचिव (विदेशी-I) समिति के सदस्य सचिव हैं।
अधिकारियों ने बताया कि चार सदस्यीय समिति जम्मू पहुंच गई है और मुख्य सचिव और डीजीपी के आने से पहले जनसांख्यिकीय अवलोकन और बदलते रुझानों पर एक प्रस्तुति दी गई। समिति 12 अगस्त तक अपनी बैठकें जारी रखेगी। अधिकारियों ने बताया कि समिति जम्मू के कई क्षेत्रों का दौरा करेगी जिनमें रोहिंग्या और बांग्लादेशी प्रवासियों की बस्तियां, साथ ही सुरक्षा और प्रशासनिक दृष्टि से संवेदनशील माने जाने वाले अंतरराष्ट्रीय सीमा के क्षेत्र शामिल हैं।
रोहिंग्या म्यांमार में बंगाली बोली बोलने वाला एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। अपने देश में उत्पीड़न के बाद उनमें से कई बांग्लादेश के रास्ते अवैध रूप से भारत में प्रवेश कर गए और जम्मू और देश के अन्य हिस्सों में शरण ली। सरकारी आंकड़ों के अनुसार जम्मू और कश्मीर के जम्मू और सांबा जिलों में रोहिंग्या मुसलमानों और बांग्लादेशी नागरिकों सहित 13,700 से अधिक विदेशी बसे हुए हैं जिनकी आबादी 2008 और 2016 के बीच 6,000 से अधिक बढ़ गई है। मार्च 2021 में पुलिस ने सत्यापन अभियान के दौरान जम्मू शहर में अवैध रूप से रह रहे 270 से अधिक रोहिंग्याओं (महिलाओं और बच्चों सहित) को पकड़ा और उन्हें कठुआ उप-जेल के अंदर एक हिरासत केंद्र में रखा। पहले भी कई भाजपा नेताओं और विभिन्न समूहों ने इस क्षेत्र में अवैध विदेशी प्रवासियों, विशेष रूप से रोहिंग्या और बांग्लादेशी नागरिकों की उपस्थिति पर चिंता जताई है। उन्होंने राष्ट्रीय सुरक्षा, जनसांख्यिकीय परिवर्तनों और स्थानीय संसाधनों के संभावित दुरुपयोग को लेकर चिंता जताते हुए सरकार से इस क्षेत्र में अवैध रूप से रह रहे लोगों की पहचान करने और उन्हें निर्वासित करने का आग्रह किया है।
