नई दिल्ली, 19 अगस्त :उच्चतम न्यायालय ने नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (एनटीए) को निर्देश दिया है कि वो नीट परीक्षा में सुधारों को संस्थागत रूप दे। जस्टिस पीएस नरसिम्हा की अध्यक्षता वाली बेंच कहा कि कागज पर तो व्यवस्था मजबूत दिखती है लेकिन इसे स्थायी और संस्थागत रुप देना जरुरी है।
मामले की सुनवाई के दौरान बुधवार को सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने परीक्षा प्रक्रिया का विस्तृत ब्यौरा दिया। तुषार मेहता ने कहा कि एनटीए की मौजूदा व्यवस्था लगभग अभेद्य है। हालांकि किसी भी स्तर पर मानवीय गलती या मानवीय हस्तक्षेप की संभावना बनी रहती है। उन्होंने कहा कि एक विषय के लिए कई मॉडरेटर करीब पांच सौ प्रश्नों का बैंक तैयार करते हैं, ताकि एक व्यक्ति यह तय न कर सके कि परीक्षा में कौन से सौ प्रश्न आएंगे। इसके बाद मॉडरेटरों का दूसरा समूह सौ-सौ प्रश्न चुनकर चार अलग-अलग प्रश्नपत्र तैयार करता है। इनमें से दो प्रश्नपत्र एनटीए के महानिदेशक परीक्षा के लिए चुनते हैं। इस पूरी प्रक्रिया में अंतिम प्रश्नपत्र को लेकर किसी एक व्यक्ति को पूरी जानकारी नहीं होती है।
उन्होंने कहा कि प्रश्नपत्र सीलबंद लिफाफे में दो अलग-अलग अधिकृत प्रिंटिंग प्रेस भेजे जाते हैं। इन प्रिंटिंग प्रेस पर सीसीटीवी और केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की निगरानी रहती है। डिजिटल कोड से बॉक्स खोला जाता और कोड की जानकारी पहले से संबंधित व्यक्ति को नहीं होती। प्रिंटिंग के बाद प्रश्नपत्रों को ऐसे सीलबंद बॉक्स में रखा जाता है जिनकी सील दोबारा इस्तेमाल नहीं की जा सकती है। प्रश्नों को अलग-अलग क्रम में रखा जाता है। 24 छात्रों के प्रत्येक समूह के लिए अगल पैकेट तैयार किए जाते हैं जिन पर वाटरमार्क नंबर, सिटी कोड, सेंटर कोड और पैकेट नंबर होता है। इसके बाद प्रश्नपत्रों को ऐसे लोहे के बॉक्स में रखा जाता है जिसे खोलने के लिए लॉक तोड़ना पड़ता है। इन प्रश्नपत्रों को जीपीएस लगे वाहनों के जरिये स्ट्रांग रुप तक पहुंचाया जाता है और पूरी गतिविधि की निगरानी एनटीए मुख्यालय से की जाती है।
मेहता के विस्तृत ब्यौरे के बाद जस्टिस पीएस नरसिम्हा ने कहा कि परीक्षा प्रणाली के ये पहलू पहले ही राधाकृष्णन कमेटी के सामने आ चुके हैं। उन्होंने कहा कि समय के साथ नये लोग आते हैं और नई व्यवस्थाएं अपनाई जाती हैं लेकिन समस्या का समाधान केवल प्रक्रिया तैयार करने से नहीं होगा। ये एक प्रक्रियागत समस्या है जिसे संस्थागत रुप देना सबसे ज्यादा जरुरी है। कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि संस्था में कितने अधिकारी हैं, कार्यालय कहां है, कितने कर्मचारी हैं, कितनी सुरक्षा व्यवस्था है इन पहलूओं को स्पष्ट रुप से तय करने की जरुरत है।






