Home राज्य झारखंड जेपीएससी, फूड सेफ्टी और सीडीपीओ नियुक्ति रद्द करने का आदेश स्थगित

जेपीएससी, फूड सेफ्टी और सीडीपीओ नियुक्ति रद्द करने का आदेश स्थगित

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रांची, 20 अगस्त : झारखंड उच्च न्यायालय ने झारखंड लोक सेवा आयोग की 11वीं, 13वीं और राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी के साथ-साथ बाल विकास परियोजना पदाधिकारी की नियुक्ति रद्द करने के झारखंड सरकार के आदेश को भी स्थगित कर दिया है।

उच्च न्यायालय के न्यायाधीश दीपक रौशन ने सौरभ सिंह बनाम राज्य सरकार के मामले की सुनवाई के बाद पत्रांक-06/लो०से०आ०-01-07/2026 का-545 रांची, दिनांक 18-8-2026 से राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति को रद्द करने के आदेश पर रोक लगा दी है। साथ ही कार्मिक विभाग की ओर से जारी इस अधिसूचना से प्रभावित अन्य लोगों को याचिका का निपटारा होने तक काम करने की अनुमति दे दी है। साथ ही 15 सितंबर को होने वाली अगली सुनवाई के दौरान अपराध अनुसंधान विभाग की जांच में मिले तथ्यों की जानकारी देने को कहा है।

उल्लेखनीय है कि कार्मिक विभाग की ओर से जारी आदेश से तीन नियुक्तियां रद्द की गई हैं। इसमें कार्मिक प्रशासनिक सुधार विभाग ने इस अधिसूचना से तीन नियुक्तियों को रद्द किया है। इस अधिसूचना से विज्ञापन संख्या 18/23 से नियुक्त राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी, विज्ञापन संख्या 21/2024 से नियुक्त राज्य सेवा के अधिकारी और विज्ञापन संख्या 21/23 से नियुक्त बाल विकास परियोजना पदाधिकारी प्रभावित हैं।

न्यायालय ने अपने फैसले के 10वें बिंदु में विज्ञापन संख्या 18/23 से नियुक्त राज्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी की नियुक्ति रद्द करने से संबंधित अधिसूचना पर रोक लगा दी है। रोक अगले आदेश तक प्रभावी रहेगी। न्यायाधीश ने फैसले के 11वें बिंदु में वरिष्ठ अतिरिक्त महाधिवक्ता को यह निर्देश दिया है कि वह संबंधित विभाग को यह सूचित करे कि याचिकाकर्ताओं और अन्य लोगों को जो इस तरह की स्थिति में हैं और इस अधिसूचना से प्रभावित हैं, उन्हें याचिका के निपटारा होने तक अपना काम जारी रखने की अनुमति दी जाए। इसके साथ ही न्यायालय ने पूरे मामले को देखते हुए याचिकाकर्ताओं को यह निर्देश दिया है कि वह इस बात का शपथपत्र दें कि आपराधिक मामले में विचारण न्यायालय का फैसला उन पर लागू होगा और सरकार कानून के अनुसार कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होगी।

मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से यह कहा गया था कि वह सभी निर्धारित प्रक्रिया के तहत नियुक्त हुए थे और नौकरी कर रहे थे। सरकार ने बिना उनका पक्ष सुने नियुक्ति को रद्द कर दिया। सरकार की यह कार्रवाई प्राकृतिक न्याय के नियमों के खिलाफ है।सुनवाई के दौरान सरकार की ओर से कोई शपथपत्र दायर नहीं किया गया था। लेकिन यह कहा गया कि नियुक्तियों में बड़े पैमाने पर गड़बड़ी हुई है। इसकी गहन जांच की जा रही है। अपराध अनुसंधान विभाग ने इस मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया है।

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