पटना: राजधानी में आवासीय मकानों और परिसरों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर चल रहे विवाद के बीच बिहार सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मामले के व्यावहारिक और जनहितकारी समाधान के लिए उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति का गठन किया है।
यह मामला सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन से जुड़ा है। पटना नगर निगम ने आवासीय क्षेत्रों में गैर-आवासीय गतिविधियों के संबंध में सर्वे के बाद बड़ी संख्या में भवन मालिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को नोटिस जारी किए हैं।
आखिर क्या है पूरा मामला?
पटना नगर निगम की ओर से आवासीय क्षेत्रों में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों का सर्वे कराया गया। इसके बाद ऐसे भवनों और परिसरों को नोटिस जारी किए गए, जहां आवासीय उपयोग के बजाय दुकान, कार्यालय, स्कूल, कोचिंग, अस्पताल, नर्सिंग होम, होटल, गोदाम सहित अन्य व्यावसायिक गतिविधियां संचालित होने की बात सामने आई।
नगर निगम की कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के अनुपालन से जुड़ी बताई जा रही है।
हजारों संपत्तियां आईं कार्रवाई के दायरे में
नगर निगम के सर्वे में बड़ी संख्या में आवासीय संपत्तियों में गैर-आवासीय गतिविधियां पाए जाने की बात सामने आई है। हाल की रिपोर्टों में 26 हजार से अधिक संपत्तियों का आंकड़ा सामने आया है, जबकि एक अलग चरण में 5,798 संपत्तियों के संबंध में नोटिस जारी किए जाने की जानकारी भी दी गई है।
इसमें दुकान, गोदाम, स्कूल, हॉस्टल, होटल, नर्सिंग होम, पार्किंग और अन्य व्यावसायिक प्रतिष्ठान शामिल बताए गए हैं।
नोटिस मिलने के बाद क्या करना होगा?
नगर निगम की ओर से नोटिस पाने वाले भवन मालिकों से संबंधित दस्तावेज और अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा गया है। इनमें मुख्य रूप से-
- जमीन या भवन के स्वामित्व से जुड़े दस्तावेज
- स्वीकृत भवन नक्शा
- अधिभोग प्रमाण-पत्र
- गैर-आवासीय उपयोग से संबंधित अनुमति या एनओसी
- व्यावसायिक गतिविधि से संबंधित अन्य वैध दस्तावेज
शामिल हैं। तय समय पर जवाब नहीं देने पर उपलब्ध सर्वे और दस्तावेजों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जा सकती है।
विधायकों ने मुख्यमंत्री के सामने उठाया मामला
आवासीय संपत्तियों के व्यावसायिक इस्तेमाल को लेकर पैदा हुई स्थिति पर पटना शहरी क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों ने मुख्यमंत्री से मुलाकात कर अपनी चिंता जाहिर की।
बताया गया कि इस कार्रवाई से बड़ी संख्या में कारोबारी, संस्थान और मकान मालिक प्रभावित हो सकते हैं। इसके बाद मुख्यमंत्री ने मामले की समीक्षा और समाधान के लिए पांच सदस्यीय समिति के गठन का फैसला लिया।
कौन-कौन हैं समिति में?
समिति की अध्यक्षता उपमुख्यमंत्री विजय कुमार चौधरी करेंगे। समिति में मंत्रियों और विधान पार्षद को भी शामिल किया गया है।
समिति का उद्देश्य सुप्रीम कोर्ट के आदेश और उसके अनुपालन के दौरान सामने आ रही व्यावहारिक समस्याओं का अध्ययन कर जनहित में समाधान की दिशा तय करना है।
क्या अब बंद होंगी आवासीय इलाकों की दुकानें और संस्थान?
फिलहाल यह कहना जल्दबाजी होगी कि सभी व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को तत्काल बंद कराया जाएगा। सरकार द्वारा गठित समिति अब पूरे मामले का अध्ययन करेगी और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुरूप व्यावहारिक समाधान तलाशेगी।
यानी, जिन लोगों को नोटिस मिला है, उनके लिए अपना वैध दस्तावेज और पक्ष रखना महत्वपूर्ण होगा।
क्यों महत्वपूर्ण है सरकार का यह फैसला?
पटना में कई दशकों से आवासीय और व्यावसायिक गतिविधियां एक-दूसरे के आसपास चलती रही हैं। ऐसे में अचानक बड़े पैमाने पर कार्रवाई होने से हजारों परिवारों, कारोबारियों और संस्थानों पर असर पड़ सकता है।
सरकार के सामने अब दोहरी चुनौती है—एक तरफ सुप्रीम कोर्ट के आदेश का अनुपालन, तो दूसरी तरफ प्रभावित लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए ऐसा रास्ता निकालना जिससे अनावश्यक रूप से कारोबार और जनजीवन प्रभावित न हो।
आगे क्या करेगी समिति?
समिति पूरे मामले में सामने आ रही समस्याओं, नगर निगम की कार्रवाई और सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन की स्थिति का अध्ययन करेगी। इसके बाद व्यावहारिक और जनहितकारी समाधान की दिशा में आवश्यक कदम सुझाए जाने की उम्मीद है।
