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भारत पांच साल में 100 नए जहाज जोड़ेगा, विदेशी शिपिंग कंपनियों को दिए जाने वाले 75 अरब डॉलर का बोझ घटाने की तैयारी

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नई दिल्ली : भारत ने विदेशी शिपिंग कंपनियों पर निर्भरता घटाने और देश के समुद्री व्यापार को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में अगले पांच वर्षों में अपने वाणिज्यिक बेड़े में 100 नए जहाज जोड़ने का लक्ष्य रखा है। केंद्रीय पत्तन, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि भारत हर साल करीब 75 अरब डॉलर का माल ढुलाई शुल्क विदेशी शिपिंग कंपनियों को देता है। इसे कम करने के लिए भारतीय जहाज मालिकों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता बढ़ाना जरूरी है।

केंद्रीय मंत्री सर्बानंद सोनोवाल ने यहां राष्ट्रीय नौवहन बोर्ड (एनएसबी) के पहले ‘सागर संवाद’ में कहा कि राष्ट्रीय नौवहन बोर्ड के पांच सूत्री रोडमैप में वित्तीय सुधार, सुनिश्चित कार्गो समर्थन, प्रतिस्पर्धी वित्त तक पहुंच, नियामकीय प्रक्रियाओं को सरल बनाना और कारोबार सुगमता को बेहतर करना शामिल है। इन उपायों के जरिए भारतीय जहाजरानी क्षेत्र को मजबूती देने और अगले पांच वर्षों में बेड़े में 100 जहाज जोड़ने की दिशा में काम किया जाएगा। कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री मनसुख मांडविया, केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर, मंत्रालय के सचिव विजय कुमार सहित जहाज मालिक, वित्तीय क्षेत्र के प्रतिनिधि, समुद्री प्रशिक्षण संस्थानों के अधिकारी, विशेषज्ञ और प्रशिक्षु अधिकारी शामिल हुए।

सोनोवाल ने इस अवसर पर राष्ट्रीय नौवहन बोर्ड की पहली आधिकारिक वेबसाइट का शुभारंभ किया। एनएसबी के अध्यक्ष समीर कुमार खरे ने बोर्ड की वर्ष 2025-26 की वार्षिक रिपोर्ट और विभिन्न उप समितियों की रिपोर्ट केंद्रीय मंत्री को सौंपी। उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय नौवहन बोर्ड वर्ष 1958 में गठित वैधानिक निकाय है, जिसका उद्देश्य सरकार को जहाजरानी नीति से जुड़े मामलों में सलाह देना है।

उन्होंने कहा कि भारत 2047 तक अपने बंदरगाहों की क्षमता बढ़ाकर 10,000 मिलियन टन प्रतिवर्ष करने की दिशा में काम कर रहा है। ऐसे में यह जरूरी है कि इस विकास का लाभ भारतीय जहाज मालिकों को मिले और देश अपने व्यापार के लिए विदेशी जहाजरानी कंपनियों पर निर्भर न रहे।

कार्यक्रम में भारतीय ध्वज वाले जहाजों को विदेशी ध्वज वाले जहाजों की तुलना में महंगा पड़ने का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा। विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने कहा कि भारतीय ध्वज के तहत जहाज चलाना विदेशी ध्वज की तुलना में करीब 16 से 20 प्रतिशत तक महंगा पड़ता है। इसके पीछे जहाजों के आयात और रखरखाव पर कर, नाविकों के वेतन पर कर कटौती, माल ढुलाई पर कर और देश में पूंजी की अपेक्षाकृत अधिक लागत जैसे कारण बताए गए।

केंद्रीय राज्य मंत्री शांतनु ठाकुर ने कहा कि भारत हर वर्ष कच्चे तेल, गैस, कोयला और यूरिया जैसे महत्वपूर्ण सामान की ढुलाई के लिए विदेशी शिपिंग कंपनियों को करीब 75 अरब डॉलर का भुगतान करता है। उन्होंने कहा कि देश को अपने व्यापारिक मार्गों और समुद्री परिवहन क्षमता पर अधिक नियंत्रण हासिल करना होगा।

एनएसबी की ओर से प्रस्तावित पांच सूत्री रोडमैप को लागू किए जाने से भारतीय बेड़े में पांच वर्षों में 100 जहाज जोड़ने में मदद मिलने की उम्मीद जताई गई। इसे 2047 तक दुनिया के शीर्ष पांच जहाज मालिक देशों में शामिल होने के भारत के लक्ष्य से भी जोड़ा गया।

कार्यक्रम में समुद्री श्रमबल से जुड़े मुद्दों पर भी चर्चा हुई। केंद्रीय श्रम एवं रोजगार तथा युवा मामले एवं खेल मंत्री मनसुख मांडविया ने कहा कि समुद्री क्षेत्र भारत के युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर पैदा कर सकता है। उन्होंने भारतीय नाविकों के लिए प्रशिक्षण क्षमता बढ़ाने, उद्योग आधारित कौशल विकास को मजबूत करने, रोजगार के नए रास्ते खोलने और समुद्री क्षेत्र में लैंगिक असमानता को दूर करने पर जोर दिया।

मांडविया ने कहा कि क्रूज शिपिंग और आधुनिक पोत निर्माण जैसे उभरते क्षेत्रों के लिए विशेष कौशल विकसित करने की जरूरत है। उन्होंने सरकार, उद्योग, व्यापार संगठनों और प्रशिक्षण संस्थानों के बीच समन्वय बढ़ाने की आवश्यकता बताई, ताकि भारत वैश्विक स्तर पर कुशल समुद्री कर्मियों की आपूर्ति करने वाले प्रमुख देशों में शामिल हो सके।

राष्ट्रीय नौवहन बोर्ड के अध्यक्ष समीर कुमार खरे ने कहा कि देश के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए बुनियादी ढांचे के विकास, बंदरगाह आधुनिकीकरण और हरित नौवहन सुधारों को आगे बढ़ाया जा रहा है। ‘सागर संवाद’ के दौरान विशेषज्ञों और उद्योग प्रतिनिधियों ने भारत के समुद्री क्षेत्र को अधिक प्रतिस्पर्धी, सक्षम और भविष्य के लिए तैयार बनाने को लेकर विभिन्न सुझाव दिए।

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