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पटना से डेढ़ गुना बड़ा होगा पाटलिपुत्र टाउनशिप, 273 गांव और 2 नगर पंचायतें होंगी शामिल

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पटना: बिहार की राजधानी पटना के बढ़ते शहरी दबाव को कम करने और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक एक नया आधुनिक शहर विकसित करने की तैयारी तेज हो गई है। राजधानी के दक्षिणी हिस्से में प्रस्तावित पाटलिपुत्र ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप का आकार मौजूदा पटना से करीब डेढ़ गुना बड़ा होगा। प्रस्तावित टाउनशिप का कुल क्षेत्रफल लगभग 81,730 एकड़ रखा गया है और यहां करीब 66 लाख लोगों के रहने की क्षमता विकसित करने की योजना है।

नगर विकास एवं आवास विभाग ने टाउनशिप का प्रारूप जारी कर दिया है। इस पर आम लोगों से 30 सितंबर तक आपत्ति और सुझाव मांगे गए हैं।

273 गांव और दो नगर पंचायतें होंगी शामिल

पाटलिपुत्र टाउनशिप का दायरा पटना जिले के 9 प्रखंडों के 273 राजस्व गांवों तक फैलेगा।

इसमें पुनपुन, नौबतपुर, मसौढ़ी, फतुहा, संपतचक, पटना ग्रामीण, धनरुआ, दनियावां और फुलवारी प्रखंड के क्षेत्र शामिल हैं। इसके अलावा दो शहरी क्षेत्र भी प्रस्तावित टाउनशिप का हिस्सा होंगे—

पुनपुन नगर पंचायत – पूर्ण क्षेत्र
नौबतपुर नगर पंचायत – आंशिक क्षेत्र

मौजूदा पटना से कितना बड़ा होगा नया शहर?

मौजूदा पटना के शहरी क्षेत्र में पटना नगर निगम के साथ दानापुर, खगौल, फुलवारी और संपतचक के क्षेत्र शामिल हैं। इनका कुल क्षेत्रफल करीब 54 हजार एकड़ बताया गया है।

इसके मुकाबले प्रस्तावित पाटलिपुत्र टाउनशिप का क्षेत्रफल करीब 81,730 एकड़ होगा। यानी मौजूदा पटना के प्रमुख शहरी क्षेत्रों को मिलाकर जितना क्षेत्र है, उससे भी यह नया शहर लगभग डेढ़ गुना बड़ा होगा।

66 लाख लोगों के लिए विकसित होगा शहर

पाटलिपुत्र टाउनशिप को सिर्फ आवासीय क्षेत्र के रूप में विकसित नहीं किया जाएगा। इसे एक पूर्ण और आधुनिक शहरी इकोसिस्टम के तौर पर विकसित करने की योजना है।

यहां बड़ी आबादी के लिए आवास के साथ रोजगार, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन और मनोरंजन की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। योजना में करीब 66 लाख लोगों के रहने की क्षमता रखी गई है।

स्कूल से अस्पताल और स्पोर्ट्स सिटी तक की सुविधा

प्रस्तावित शहर में लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कई तरह की सुविधाएं विकसित करने की योजना है।

इसमें शामिल हैं-

  • स्कूल और कॉलेज
  • अस्पताल और स्वास्थ्य केंद्र
  • आवासीय क्षेत्र
  • औद्योगिक क्षेत्र
  • बाजार और कॉम्प्लेक्स
  • पार्क और हरित क्षेत्र
  • स्पोर्ट्स सिटी
  • मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब
  • जलापूर्ति और सीवरेज व्यवस्था
  • आधुनिक सड़क और सार्वजनिक परिवहन
  • शहरी कृषि के लिए निर्धारित क्षेत्र

सरकार का उद्देश्य ऐसा शहर विकसित करना है जहां लोगों को रोजगार और बुनियादी सुविधाओं के लिए दूर न जाना पड़े।

पटना पर आबादी का दबाव होगा कम

पाटलिपुत्र टाउनशिप के विकास का एक बड़ा उद्देश्य राजधानी पटना पर बढ़ते आबादी और शहरीकरण के दबाव को कम करना है।

नया शहर विकसित होने से पटना के आसपास औद्योगिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इससे रोजगार के नए अवसर पैदा हो सकते हैं और राजधानी क्षेत्र में सुनियोजित विकास को गति मिल सकती है।

2047 की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार हो रहा प्लान

पाटलिपुत्र टाउनशिप को सिर्फ वर्तमान जरूरतों के लिए नहीं, बल्कि 2047 की संभावित आबादी और शहरी जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित करने की योजना है।

इसमें आवास के साथ-साथ उद्योग, शिक्षा, स्वास्थ्य, परिवहन, खेल, हरित क्षेत्र और शहरी कृषि जैसी गतिविधियों के लिए अलग-अलग क्षेत्र निर्धारित किए जाने की योजना है।

जमीन को लेकर किसानों की चिंता भी सामने आई

टाउनशिप के प्रस्ताव के साथ जमीन से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। परियोजना के दायरे में बड़ी संख्या में गांव आने के कारण किसानों और जमीन मालिकों के बीच अपनी जमीन और भविष्य को लेकर चिंता देखी जा रही है।

सरकार की ओर से भूमि व्यवस्था के लिए लैंड पूलिंग, खरीद, समझौता और हाइब्रिड मॉडल जैसे विकल्पों पर काम किया जा रहा है।

हाल की बैठकों में कुछ किसानों ने परियोजना का विरोध भी जताया है और अपनी जमीन को लेकर आपत्तियां रखी हैं।

बिहार में बनेंगे कुल 12 सैटेलाइट टाउनशिप

पाटलिपुत्र टाउनशिप बिहार में प्रस्तावित अकेला नया शहर नहीं है। राज्य सरकार ने कुल 12 सैटेलाइट टाउनशिप विकसित करने की योजना बनाई है।

इनमें राज्य के सभी 9 प्रमंडलीय मुख्यालयों के अलावा सीतामढ़ी, सोनपुर और डेहरी के आसपास भी नए शहर विकसित करने की योजना शामिल है।

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