पटना: बिहार में परीक्षा व्यवस्था को अधिक पारदर्शी, निष्पक्ष, सुरक्षित और आधुनिक बनाने के लिए राज्य सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। सरकार ने परीक्षा प्रणाली में व्यापक सुधार के लिए पांच सदस्यीय विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्णय लिया है। समिति की अध्यक्षता पटना हाईकोर्ट के जस्टिस हरीश कुमार करेंगे। समिति को परीक्षा व्यवस्था की समीक्षा कर सुधारों को लेकर अपनी अनुशंसाएं सरकार को देने की जिम्मेदारी दी गई है।
बोर्ड से भर्ती परीक्षा तक होगी समीक्षा
नई समिति का दायरा केवल किसी एक परीक्षा तक सीमित नहीं रहेगा। इसके तहत बोर्ड परीक्षा, विश्वविद्यालय परीक्षा, व्यावसायिक एवं तकनीकी परीक्षा, प्रवेश परीक्षा और भर्ती एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था की समीक्षा की जाएगी।
सरकार का उद्देश्य ऐसी परीक्षा प्रणाली तैयार करना है, जो सुरक्षित होने के साथ-साथ समयबद्ध, तकनीकी रूप से सक्षम, विश्वसनीय और विद्यार्थियों के लिए सुलभ हो।
पेपर लीक और नकल पर लगेगी रोक
समिति परीक्षा प्रक्रिया में होने वाली गड़बड़ियों को रोकने के लिए विशेष उपाय सुझाएगी। इसमें पेपर लीक, सामूहिक नकल, फर्जी परीक्षार्थी, उत्तर पुस्तिका से छेड़छाड़ और परीक्षा संबंधी डेटा में अनधिकृत हस्तक्षेप जैसी समस्याओं पर नियंत्रण के उपाय शामिल होंगे।
प्रश्नपत्र तैयार करने से लेकर उसके सुरक्षित भंडारण, परिवहन और परीक्षा केंद्र तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया की समीक्षा की जाएगी।
AI और डिजिटल तकनीक का होगा इस्तेमाल
परीक्षा व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक, डेटा एनालिटिक्स और साइबर सुरक्षा जैसे उपायों पर भी समिति सुझाव देगी।
परीक्षा केंद्रों पर बायोमेट्रिक सत्यापन और CCTV निगरानी को मजबूत करने के साथ प्रश्नपत्र और उत्तर पुस्तिकाओं की सुरक्षित ट्रैकिंग की व्यवस्था विकसित करने पर भी विचार किया जाएगा।
परीक्षा कैलेंडर और रिजल्ट में समयबद्धता पर जोर
समिति परीक्षा के पूरे चक्र की समीक्षा करेगी। इसमें पंजीकरण, प्रश्नपत्र तैयार करना, परीक्षा संचालन, मूल्यांकन, रिजल्ट जारी करना और शिकायतों के निवारण तक की प्रक्रिया शामिल होगी।
सरकार चाहती है कि परीक्षाएं निर्धारित समय पर हों और परिणाम जारी करने में अनावश्यक देरी न हो।
ग्रामीण और कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों का भी रखा जाएगा ध्यान
परीक्षा सुधार के दौरान ग्रामीण क्षेत्रों, आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों और डिजिटल सुविधाओं से कम जुड़े विद्यार्थियों के हितों पर भी विशेष ध्यान देने की बात कही गई है।
समिति यह देखेगी कि तकनीक आधारित परीक्षा व्यवस्था लागू होने के बावजूद किसी विद्यार्थी को संसाधनों की कमी के कारण नुकसान न उठाना पड़े।
तीन महीने में देनी होगी अनुशंसा
समिति को परीक्षा व्यवस्था में सुधार के लिए अपनी अनुशंसाएं तीन महीने के भीतर सरकार को सौंपने की जिम्मेदारी दी गई है। इसके बाद समिति की सिफारिशों के आधार पर परीक्षा प्रणाली में आवश्यक बदलाव किए जा सकते हैं।
सरकार का फोकस- छात्रों का भरोसा बढ़ाना
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी पहले ही बिहार में परीक्षाओं को सुचारु, पारदर्शी, निष्पक्ष और आधुनिक बनाने पर जोर दे चुके हैं। सरकार के अनुसार, परीक्षा व्यवस्था में विद्यार्थियों का विश्वास सबसे महत्वपूर्ण है और इसी उद्देश्य से व्यापक सुधार की दिशा में कदम उठाए जा रहे हैं।
