बक्सर : शिक्षक-छात्रा प्रकरण को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच बक्सर के एक शिक्षक के खिलाफ गया में गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज होने का मामला सामने आया है। आचार्य नरेंद्र देव मध्य विद्यालय में पदस्थापित शिक्षक प्रकाश पाठक उर्फ मि. राइट के खिलाफ यौन शोषण, धोखाधड़ी, जबरन वसूली और साजिश समेत कई धाराओं में मामला दर्ज होने की बात सामने आई है। आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद बक्सर शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
बताया जा रहा है कि आरोपित शिक्षक फिलहाल विद्यालय में नियमित रूप से ड्यूटी कर रहे हैं और उनकी उपस्थिति भी दर्ज हो रही है। मामला गया की एक महिला शिक्षिका के परिवाद से जुड़ा है। महिला शिक्षिका की शिकायत पर गया कोतवाली थाने में शिक्षक प्रकाश पाठक समेत तीन लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामला जून महीने का बताया जा रहा है।
प्राथमिकी में महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया है कि प्रकाश पाठक ने शिक्षकों की विभागीय समस्याओं को लेकर बनाए गए एक व्हाट्सऐप ग्रुप के माध्यम से उनसे संपर्क किया था। शिकायत के अनुसार, उन्होंने अपनी ऊंची पहुंच का हवाला देते हुए महिला को शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से विधायक बनवाने का भरोसा भी दिया।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि फरवरी 2024 में शिक्षकों की बैठक के नाम पर महिला शिक्षिका को वाराणसी बुलाया गया। वहां संगठन से जुड़ी जरूरतों का हवाला देते हुए उनसे 1.50 लाख रुपये की मांग की गई। महिला शिक्षिका ने आरोप लगाया कि वाराणसी के एक होटल में उन्हें पेय पदार्थ में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया और इसके बाद उनके साथ जबरन यौन शोषण किया गया।
शिकायत के मुताबिक, घटना का वीडियो बनाए जाने के बाद उसे प्रसारित करने और जान से मारने की धमकी देकर महिला को कथित तौर पर ब्लैकमेल किया गया। बदनामी के डर से अलग-अलग समय पर नगद और ऑनलाइन माध्यम से रकम देने का भी आरोप लगाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि रकम देने में असमर्थता जताने पर महिला को गया के एक होटल में बुलाकर धमकी दी जाती थी।
मामले में प्रकाश पाठक के अलावा कृष्णा कुमार प्रजापति और गंगाराम मदन प्रसाद को भी आरोपित बनाया गया है। पीड़िता ने इससे पहले 22 अक्टूबर 2024 को गया के वरीय पुलिस अधीक्षक को लिखित आवेदन देकर शिकायत की थी।
अब इस मामले में सबसे बड़ा सवाल बक्सर शिक्षा विभाग की भूमिका को लेकर उठ रहा है। गंभीर आरोपों में प्राथमिकी दर्ज होने के बावजूद आरोपित शिक्षक के विद्यालय में नियमित रूप से ड्यूटी करने और हाजिरी बनाए जाने की बात सामने आने के बाद विभागीय कार्रवाई पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, प्राथमिकी में लगाए गए आरोपों की पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।
