पटना : बिहार के एडवोकेट जनरल की नियुक्ति को लेकर विकासशील इंसान पार्टी (VIP) ने सरकार से नियुक्ति प्रक्रिया और पात्रता सत्यापन से जुड़ी जानकारी सार्वजनिक करने की मांग की है। पार्टी के राष्ट्रीय मुख्य प्रवक्ता देव ज्योति ने कहा कि एडवोकेट जनरल का पद सामान्य सरकारी पद नहीं, बल्कि संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत स्थापित महत्वपूर्ण संवैधानिक पद है। ऐसे में नियुक्ति की प्रक्रिया में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है।
देव ज्योति ने कहा कि बिहार सरकार और विधि विभाग को स्पष्ट करना चाहिए कि एडवोकेट जनरल की नियुक्ति से पहले संवैधानिक पात्रता का सत्यापन किस प्रक्रिया और किस आधार पर किया गया। उन्होंने कहा कि वर्तमान एडवोकेट जनरल एस. डी. संजय की नियुक्ति को लेकर जो सवाल उठ रहे हैं, सरकार को उनका तथ्यात्मक और विधिसम्मत जवाब देना चाहिए।
उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 165 के तहत राज्य के एडवोकेट जनरल की नियुक्ति का प्रावधान है। नियुक्ति के लिए संबंधित व्यक्ति में उच्च न्यायालय के न्यायाधीश के रूप में नियुक्ति के लिए निर्धारित संवैधानिक योग्यता होना आवश्यक है। ऐसे में सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि नियुक्ति से पहले इन संवैधानिक प्रावधानों का किस स्तर पर परीक्षण किया गया था।
VIP प्रवक्ता ने यह भी सवाल उठाया कि क्या नियुक्ति से पूर्व संबंधित व्यक्ति की संवैधानिक पात्रता को लेकर स्वतंत्र कानूनी राय ली गई थी। उन्होंने सरकार से यह भी स्पष्ट करने की मांग की कि क्या विधि विभाग ने अनुच्छेद 165 और 217 के प्रावधानों तथा उनसे संबंधित संवैधानिक व्याख्याओं पर विधिवत विचार किया था।
देव ज्योति ने कहा कि संवैधानिक पदों की गरिमा और जनता का भरोसा तभी कायम रह सकता है, जब नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी हो। उन्होंने मांग की कि सरकार नियुक्ति में अपनाई गई संवैधानिक और कानूनी प्रक्रिया की जानकारी सार्वजनिक करे। साथ ही पात्रता सत्यापन के दौरान किन दस्तावेजों और मानदंडों को आधार बनाया गया, इसकी भी जानकारी दी जाए।
उन्होंने कहा कि यदि इस मामले में कोई कानूनी राय या पात्रता संबंधी परीक्षण कराया गया है, तो उसके बारे में भी उचित स्तर पर जानकारी सामने आनी चाहिए। यदि समीक्षा में किसी अनिवार्य संवैधानिक प्रावधान के उल्लंघन का वास्तविक आधार मिलता है, तो सरकार को निष्पक्ष जांच कर संविधान और कानून के अनुरूप आवश्यक कदम उठाना चाहिए।
देव ज्योति ने स्पष्ट किया कि उनका सवाल किसी व्यक्ति विशेष के खिलाफ अभियान नहीं है। मुद्दा केवल यह है कि राज्य के सर्वोच्च विधि अधिकारी के पद पर नियुक्ति संविधान में निर्धारित मानकों और प्रक्रिया के अनुरूप हुई है या नहीं। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में संवैधानिक संस्थाओं के प्रति जनता का विश्वास बनाए रखने के लिए ऐसे सवालों का स्पष्ट, तथ्यात्मक और पारदर्शी जवाब दिया जाना जरूरी है।
उन्होंने कहा कि संविधान सर्वोच्च है और संवैधानिक पदों पर नियुक्तियां राजनीतिक या व्यक्तिगत पसंद के आधार पर नहीं, बल्कि संविधान में निर्धारित व्यवस्था के अनुसार होनी चाहिए। कानून सभी के लिए समान है और किसी भी संवैधानिक पद को इसके दायरे से अलग नहीं माना जा सकता।
