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बिहार में 11वीं की परीक्षा पर सवाल, कम कक्षाओं और अधूरे सिलेबस के बीच 18 सितंबर से एग्जाम

पटना: बिहार के प्लस टू स्कूलों और इंटर कॉलेजों में 11वीं कक्षा की पढ़ाई शुरू हुए अभी एक महीना भी पूरा नहीं हुआ है, लेकिन विद्यार्थियों की त्रैमासिक परीक्षा की तारीख तय कर दी गई है। 18 सितंबर से परीक्षा आयोजित होनी है। ऐसे में कम समय में परीक्षा की तैयारी करना छात्रों और शिक्षकों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है।

कई स्कूलों में 25 से 35 दिन ही चली कक्षाएं

जानकारी के अनुसार, कई स्कूलों में 11वीं की कक्षाएं अब तक केवल 25 से 35 दिन ही संचालित हो पाई हैं। वहीं, 11वीं में नामांकित आधे से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति 20 दिन भी पूरी नहीं हुई है। नियमित कक्षाएं नहीं चलने के कारण विद्यार्थियों को पाठ्यक्रम पूरा करने में भी परेशानी हो रही है।

30 फीसदी सिलेबस भी पूरा नहीं

त्रैमासिक परीक्षा के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम का बड़ा हिस्सा अब तक पढ़ाया नहीं जा सका है। शिक्षकों के मुताबिक कई स्कूलों में परीक्षा के सिलेबस का 30 फीसदी हिस्सा भी पूरा नहीं हुआ है। ऐसे में अधूरे पाठ्यक्रम और कम कक्षा संचालन के बीच विद्यार्थियों को परीक्षा में शामिल होना पड़ेगा।

नामांकन प्रक्रिया से प्रभावित हुई पढ़ाई

11वीं की पढ़ाई पर सबसे ज्यादा असर नामांकन प्रक्रिया का पड़ा है। जुलाई में इंटर में नामांकन चलता रहा। इसके बाद ऑनस्पॉट नामांकन के तहत 11 अगस्त तक प्लस टू स्कूलों और इंटर कॉलेजों में दाखिले लिये गए। इस दौरान कुछ कक्षाएं जरूर हुईं, लेकिन नियमित पढ़ाई का संचालन नहीं हो सका। इसका असर छात्रों की उपस्थिति के साथ-साथ पाठ्यक्रम पूरा होने की गति पर भी पड़ा।

50 फीसदी से ज्यादा छात्रों की उपस्थिति 20 दिन से कम

स्कूलों में उपलब्ध उपस्थिति के आंकड़ों के मुताबिक 11वीं में नामांकित 50 फीसदी से अधिक विद्यार्थियों की उपस्थिति अभी 20 दिन भी पूरी नहीं हुई है। शिक्षकों का कहना है कि साइंस और कॉमर्स संकाय में छात्रों की उपस्थिति अपेक्षाकृत कम रही है। इससे नियमित पढ़ाई कराना भी चुनौतीपूर्ण बना हुआ है।

कई विषयों की अब तक नहीं हुई कक्षा

शहरी क्षेत्र के कई प्लस टू स्कूलों में प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए परीक्षा केंद्र बनाए जाने से भी पढ़ाई प्रभावित हुई है। शिक्षकों के अनुसार 11वीं के कुछ विषयों की अब तक एक भी कक्षा नहीं हो पाई है। कई विषयों में पढ़ाई की शुरुआत ही नहीं हो सकी है।

ग्रामीण स्कूलों में बैठने की समस्या

ग्रामीण इलाकों के कई स्कूलों में विद्यार्थियों को कक्षा में बैठाने के लिए पर्याप्त जगह नहीं होने की समस्या भी सामने आ रही है। सीमित कक्ष और अधिक विद्यार्थियों की संख्या के कारण सभी छात्रों के लिए नियमित रूप से कक्षा में बैठना मुश्किल हो रहा है। इसका सीधा असर पढ़ाई की निरंतरता पर पड़ रहा है।

18 सितंबर से परीक्षा, तैयारी के लिए समय कम

एक तरफ स्कूलों में पढ़ाई का समय कम रहा है और दूसरी ओर 18 सितंबर से त्रैमासिक परीक्षा शुरू होनी है। ऐसे में विद्यार्थियों के पास तैयारी के लिए बहुत कम समय बचा है। शिक्षकों का कहना है कि निर्धारित पाठ्यक्रम को पूरा करने और छात्रों को परीक्षा के लिए तैयार करने में काफी कठिनाई आ रही है। अधूरे सिलेबस के बीच होने वाली परीक्षा को लेकर विद्यार्थियों में भी चिंता बनी हुई है।

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