डेस्क : बिहार में रोजगार और आय बढ़ाने को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार ने अगले कुछ वर्षों के लिए बड़े लक्ष्य तय किए हैं। मुख्यमंत्री ने अगस्त 2026 में कहा था कि अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को नौकरी एवं रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने हालिया बातचीत में सरकार की आर्थिक वृद्धि, रोजगार और विकास से जुड़ी योजनाओं का उल्लेख किया।
प्रति व्यक्ति आय बढ़ाने पर जोर
सरकार की योजना में बिहार की अर्थव्यवस्था को तेज गति देने के साथ-साथ लोगों की आय बढ़ाना भी प्रमुख लक्ष्य बताया गया है। मुख्यमंत्री के अनुसार, राज्य की अर्थव्यवस्था को अगले कुछ वर्षों में कई गुना बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने भी बिहार की जीडीपी वृद्धि और प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी का उल्लेख किया।
1 करोड़ लोगों को रोजगार से जोड़ने का लक्ष्य
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 21 अगस्त 2026 को कहा था कि अगले पांच वर्षों में एक करोड़ लोगों को नौकरी एवं रोजगार देने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे पहले सरकार ने 2020 में 10 लाख सरकारी नौकरियों और 10 लाख रोजगार का लक्ष्य रखा था। सरकार के अनुसार, इसके मुकाबले करीब 12 लाख सरकारी नौकरियां और लगभग 51 लाख लोगों को रोजगार से जोड़ा गया।
महिलाओं के रोजगार पर भी विशेष फोकस
महिलाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने अलग लक्ष्य भी घोषित किया है। अगस्त 2026 में मुख्यमंत्री ने अगले तीन वर्षों में एक करोड़ महिलाओं को सीधे रोजगार से जोड़ने की बात कही थी। इसके तहत डेयरी, सुधा बिक्री केंद्र, दूध संग्रहण केंद्र, मत्स्य एवं पशुपालन जैसी गतिविधियों से महिलाओं को जोड़ने की योजना बताई गई।
कौशल विकास और रोजगार मेलों पर जोर
रोजगार बढ़ाने के लिए कौशल विकास को भी योजना का महत्वपूर्ण हिस्सा बताया गया है। दिसंबर 2025 में सम्राट चौधरी ने कहा था कि 32 लाख युवाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। वहीं, सरकार ने अगले वर्ष से बिहार के सभी जिलों में रोजगार मेले आयोजित करने की घोषणा भी की है।
रोजगार के लिए ऑनलाइन प्लेटफॉर्म भी
बिहार सरकार ने ‘बिहार रोजगार सेतु’ नाम से एकीकृत ऑनलाइन मंच शुरू किया है, जहां रोजगार तलाशने वाले लोग पंजीकरण, उपलब्ध नौकरियों की जानकारी और आवेदन जैसी सुविधाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं।
आगे की दिशा
सरकार के बताए रोडमैप में आर्थिक वृद्धि, प्रति व्यक्ति आय में बढ़ोतरी, कौशल विकास, महिला रोजगार, उद्योग और रोजगार मेलों को जोड़कर रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिखाई देता है। हालांकि, एक करोड़ रोजगार के लक्ष्य की वास्तविक प्रगति को आंकने के लिए समय-समय पर सरकारी आंकड़ों और रोजगार सृजन के स्वतंत्र आंकड़ों को देखना महत्वपूर्ण होगा।
