पटना : राजधानी में संपत्ति कर (Property Tax) को लेकर पटना नगर निगम ने अब सख्ती बढ़ाने की तैयारी कर ली है। निगम का फोकस ऐसे मकानों और व्यावसायिक संपत्तियों की पहचान करने पर है, जो अभी तक प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में नहीं हैं या जिनका टैक्स रिकॉर्ड वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाता।
नगर निगम की टीम घर-घर जाकर संपत्तियों की जानकारी का सत्यापन करेगी। इसके साथ ही जरूरत के अनुसार नई संपत्तियों का आकलन और पहले से दर्ज संपत्तियों का री-असेसमेंट किया जाएगा। इसका उद्देश्य नगर निगम के राजस्व आधार को बढ़ाना और संपत्ति कर के रिकॉर्ड को अपडेट करना है।
30 सितंबर तक स्व-कर निर्धारण का मौका
नगर निगम ने संपत्ति मालिकों को पहले खुद अपनी संपत्ति का आकलन कर टैक्स निर्धारण कराने का अवसर दिया है। इसके लिए 30 सितंबर तक स्व-कर निर्धारण (Self Assessment) किया जा सकता है।
निगम के अनुसार इसके बाद 1 अक्टूबर से घर-घर जाकर संपत्तियों की जांच शुरू की जाएगी। जांच के दौरान यदि किसी संपत्ति का टैक्स निर्धारण नहीं मिला या संपत्ति की वास्तविक स्थिति और दर्ज विवरण में अंतर पाया गया, तो नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।
5 लाख से अधिक संपत्तियों को टैक्स दायरे में लाने का लक्ष्य
नगर निगम का लक्ष्य शहर में पांच लाख से अधिक संपत्तियों को प्रॉपर्टी टैक्स के दायरे में लाना है। हालिया सर्वे और उपलब्ध आंकड़ों में बड़ी संख्या में ऐसे मकानों और संपत्तियों की पहचान हुई है, जिनका टैक्स रिकॉर्ड अभी निगम के पास दर्ज नहीं है।
नगर निगम के रिकॉर्ड में फिलहाल करीब 3.10 लाख संपत्तियों का टैक्स निर्धारण हुआ है, जबकि नए सर्वे में इससे काफी अधिक मकानों की पहचान हुई है।
बिजली कनेक्शन के आधार पर भी होगी पहचान
निगम संपत्ति कर का दायरा बढ़ाने के लिए बिजली कनेक्शन से जुड़े आंकड़ों का भी इस्तेमाल कर रहा है। इससे उन संपत्तियों की पहचान में मदद मिलेगी, जो बिजली कनेक्शन तो रखती हैं, लेकिन नगर निगम के संपत्ति कर रिकॉर्ड में दर्ज नहीं हैं।
इससे निगम को यह पता लगाने में मदद मिलेगी कि किन संपत्तियों का नया आकलन किया जाना है और किन संपत्तियों के पुराने रिकॉर्ड को अपडेट करने की जरूरत है।
एक मकान में कई बिजली मीटर होने पर क्या होगा?
कई मकान मालिकों के घर में एक से अधिक बिजली मीटर हैं। इसे लेकर लोगों के बीच यह सवाल भी है कि क्या हर बिजली मीटर के आधार पर अलग-अलग प्रॉपर्टी टैक्स लगेगा।
नगर निगम ने स्पष्ट किया है कि केवल अलग-अलग बिजली मीटर होने का मतलब यह नहीं है कि हर मीटर के लिए अलग संपत्ति कर लगाया जाएगा। टैक्स निर्धारण संपत्ति और उसके वास्तविक उपयोग तथा निगम के निर्धारित नियमों के आधार पर किया जाएगा।
गलत जानकारी मिलने पर हो सकती है अतिरिक्त वसूली
नगर निगम के नियमों के अनुसार यदि संपत्ति मालिक ने जानबूझकर संपत्ति की जानकारी छिपाई है या कम क्षेत्रफल/गलत विवरण देकर टैक्स का आकलन कराया है, तो वास्तविक देय कर और जमा किए गए कर के अंतर की वसूली की जा सकती है। निगम की वेबसाइट के अनुसार ऐसे मामलों में अंतर की राशि पर 100 प्रतिशत तक जुर्माना भी लगाया जा सकता है।
निगम का राजस्व बढ़ाना भी अभियान का उद्देश्य
इस अभियान के पीछे सिर्फ पुराने रिकॉर्ड को दुरुस्त करना ही नहीं, बल्कि नगर निगम की आय बढ़ाना भी एक प्रमुख उद्देश्य है। वित्तीय वर्ष 2026-27 में निगम ने प्रॉपर्टी टैक्स से 200 करोड़ रुपये राजस्व जुटाने का लक्ष्य रखा है। 1 अप्रैल से 16 जून 2026 के बीच निगम 31 करोड़ रुपये से अधिक संपत्ति कर वसूल चुका था।
हाल के विशेष अभियानों में निगम की टीमें घर-घर जाकर टैक्स बकाया की वसूली के साथ-साथ नई संपत्तियों का आकलन और पुराने रिकॉर्ड का री-असेसमेंट भी कर रही हैं। 15 सितंबर के अभियान में 113 संपत्तियों का आकलन और 35 संपत्तियों का सेल्फ-री-असेसमेंट किया गया था।
संपत्ति मालिक क्या करें?
जिन लोगों ने अभी तक अपनी संपत्ति का प्रॉपर्टी टैक्स निर्धारित नहीं कराया है या जिनकी संपत्ति में निर्माण, क्षेत्रफल अथवा उपयोग में बदलाव हुआ है, उन्हें अपना रिकॉर्ड अपडेट कराने की सलाह दी गई है।
पटना नगर निगम के अनुसार नागरिक ऑनलाइन माध्यम से भी संपत्ति कर से संबंधित सेवाओं का लाभ ले सकते हैं। नया Property ID, टैक्स भुगतान, म्यूटेशन और री-असेसमेंट जैसी सुविधाएं निगम के पोर्टल पर उपलब्ध हैं।
