पटना : बिहार की राजनीति में सोमवार को एक अहम बदलाव सामने आया है। बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। उनके इस्तीफे के बाद विधान परिषद के सभापति पद को लेकर नए राजनीतिक समीकरण की चर्चा तेज हो गई है।
NDA में पदों के बंटवारे से जुड़ा बदलाव
अवधेश नारायण सिंह भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के विधान परिषद सदस्य हैं। रिपोर्टों के अनुसार, बिहार में नई सरकार के गठन के बाद एनडीए के भीतर महत्वपूर्ण संवैधानिक पदों के बंटवारे को लेकर चर्चा चल रही थी।
मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष का पद बीजेपी के पास होने के बाद विधान परिषद के सभापति का पद जनता दल यूनाइटेड (JDU) को दिए जाने की बात सामने आ रही थी। इसी क्रम में अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे को देखा जा रहा है।
रामवचन राय का नाम सबसे आगे
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद अब जेडीयू के वरिष्ठ नेता और विधान परिषद के मौजूदा उपसभापति रामवचन राय का नाम सभापति पद के लिए चर्चा में है।
रिपोर्टों के मुताबिक, उन्हें शुरुआती तौर पर कार्यकारी सभापति की जिम्मेदारी दी जा सकती है। इसके बाद सभापति के चुनाव और नियुक्ति की औपचारिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी। हालांकि, नए सभापति के रूप में उनके नाम की औपचारिक घोषणा अभी बाकी है।
लंबे समय से विधान परिषद से जुड़े हैं रामवचन राय
रामवचन राय लंबे समय से बिहार विधान परिषद की राजनीति से जुड़े रहे हैं। वे वर्तमान में परिषद के उपसभापति हैं और जुलाई 2024 में निर्विरोध इस पद पर चुने गए थे।
राजनीति के अलावा उनका शैक्षणिक क्षेत्र से भी जुड़ाव रहा है। वे पटना विश्वविद्यालय के हिंदी विभाग से जुड़े रहे हैं और प्रोफेसर के तौर पर भी कार्य कर चुके हैं।
क्या बदलेगा बिहार की राजनीति में?
अवधेश नारायण सिंह के इस्तीफे के बाद अब सबकी नजर विधान परिषद के अगले सभापति पर है। यदि रामवचन राय को यह जिम्मेदारी मिलती है, तो विधान परिषद के सभापति का पद जेडीयू के खाते में चला जाएगा।
यह बदलाव बिहार में बीजेपी और जेडीयू के बीच महत्वपूर्ण पदों के बंटवारे के मौजूदा समीकरण से जुड़ा हुआ है। हालांकि, नए सभापति को लेकर अंतिम स्थिति औपचारिक प्रक्रिया पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।
