पटना : बिहार में बाढ़ प्रबंधन, सड़क कनेक्टिविटी और ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी बड़ी परियोजनाओं को लेकर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने गुरुवार को उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक में गंगा, गंडक और कोसी नदी से जुड़ी परियोजनाओं के साथ बक्सर-भागलपुर ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे, पीरपैंती तापीय विद्युत परियोजना और पीएम-कुसुम योजना की प्रगति की समीक्षा की गई।
मुख्यमंत्री ने सभी संबंधित विभागों को परियोजनाओं में तेजी लाने, आपसी समन्वय बनाए रखने और निर्धारित समय-सीमा के भीतर काम पूरा करने का निर्देश दिया।
कोसी के लिए दीर्घकालिक बाढ़ प्रबंधन पर जोर
कोसी नदी प्रणाली की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी एक गतिशील और आपस में जुड़ी हुई नदी प्रणाली है। इसलिए बाढ़ प्रबंधन को केवल हर साल आने वाली बाढ़ के दौरान राहत और बचाव तक सीमित नहीं रखा जा सकता।
उन्होंने दीर्घकालिक बाढ़ जोखिम न्यूनीकरण की रणनीति तैयार करने का निर्देश दिया। इसके तहत कोसी क्षेत्र को बहु-जिला नदी गलियारे के रूप में देखते हुए लोगों, संपत्तियों और सड़क संपर्क को ध्यान में रखकर समग्र योजना बनाने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री ने गाद प्रबंधन को प्राथमिकता देने और नए बैराज के निर्माण की दिशा में आवश्यक कार्रवाई करने को भी कहा।
कोसी के डेंजर जोन में डबल शीट पायलिंग का निर्देश
मुख्यमंत्री ने कहा कि कोसी क्षेत्र के शुरुआती करीब 100 किलोमीटर का हिस्सा विशेष डेंजर जोन है। यहां डबल शीट पायलिंग की आवश्यकता है। साथ ही नदियों से गाद निकालने पर भी जोर दिया गया, जिससे जल संग्रहण और नदी के प्रवाह की क्षमता को बेहतर बनाए रखने में मदद मिल सके।
उन्होंने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी राहत के साथ-साथ वहां आर्थिक गतिविधियों और विकास को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई।
गंडक के तटबंधों पर लगाए जाएंगे सोलर प्लांट
गंडक नदी से संबंधित योजनाओं की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने तटबंधों पर सोलर प्लांट लगाने की संभावनाओं पर काम करने का निर्देश दिया। उनका जोर बाढ़ प्रबंधन के साथ-साथ उपलब्ध सरकारी भूमि और आधारभूत संरचनाओं के बेहतर उपयोग पर रहा।
बक्सर-भागलपुर 6-लेन एक्सप्रेस-वे की भी समीक्षा
बैठक में बक्सर-भागलपुर 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेस-वे की प्रगति की भी समीक्षा हुई। इस परियोजना की कुल लंबाई 348.196 किलोमीटर है। इसमें करीब 336.205 किलोमीटर हिस्सा बिहार में और लगभग 12 किलोमीटर हिस्सा उत्तर प्रदेश में है।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को परियोजना के काम में तेजी लाने और तय समय-सीमा का पालन सुनिश्चित करने को कहा।
इसके अलावा बैठक में इन प्रमुख सड़क परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई:
- गंगा-अंबिका पथ – बिदुपुर से दिघवारा
- नारायणी पथ – दरिहारा से डुमरिया घाट
- विश्वामित्र पथ – बक्सर-आरा-मनेर
पीरपैंती के 2400 मेगावाट पावर प्लांट की प्रगति पर चर्चा
ऊर्जा विभाग की समीक्षा के दौरान पीरपैंती तापीय विद्युत परियोजना पर भी चर्चा हुई। इस परियोजना की कुल क्षमता 2400 मेगावाट (3×800 मेगावाट) है। इसके साथ ही बांका तापीय विद्युत संयंत्र से संबंधित कार्यों की भी जानकारी ली गई।
कृषि फीडरों का होगा सोलराइजेशन, सौर ऊर्जा से चलेंगे राजकीय नलकूप
मुख्यमंत्री ने पीएम-कुसुम योजना के तहत कृषि फीडरों के सोलराइजेशन की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने इस काम को तेजी से पूरा करने का निर्देश दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि किसानों को पर्याप्त और भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के साथ-साथ सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना जरूरी है। इसके साथ ही राजकीय नलकूपों को सौर ऊर्जा से संचालित करने की दिशा में भी तेजी से काम करने को कहा गया।
बाढ़, सड़क और ऊर्जा परियोजनाओं की नियमित निगरानी
मुख्यमंत्री ने संबंधित विभागों को सभी परियोजनाओं की नियमित निगरानी और आपसी समन्वय सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि बाढ़ प्रबंधन के लिए स्थायी समाधान की दिशा में योजनाबद्ध तरीके से काम होना चाहिए।
बैठक में मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार, मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत, पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल, ऊर्जा विभाग के सचिव अजय यादव, मुख्यमंत्री के सचिव संजय कुमार सिंह, जल संसाधन विभाग के सचिव डॉ. चन्द्रशेखर सिंह और बिहार राज्य पथ विकास निगम लिमिटेड के प्रबंध निदेशक सौरभ जोरवाल समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
