पटना: बिहार में युवाओं से जुड़ी सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में अब लापरवाही और अनियमितता पर लगाम लगाने की तैयारी है। बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना समेत युवाओं से जुड़ी अन्य योजनाओं की जिला स्तर पर होने वाली प्रक्रिया की अब पटना से सीधी निगरानी की जाएगी। इसके लिए राज्य के सभी 38 जिला निबंधन एवं परामर्श केंद्र यानी DRCC को कमांड एंड कंट्रोल सेंटर से जोड़ा जाएगा।
पटना स्थित कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए जिलों में होने वाले कामकाज की लाइव ट्रैकिंग की जाएगी। इससे आवेदन के निबंधन से लेकर दस्तावेजों के भौतिक सत्यापन और लंबित मामलों तक पर मुख्यालय की सीधी नजर रहेगी। किसी आवेदन को बेवजह लंबित रखने या बिना उचित कारण के अस्वीकृत करने की स्थिति में संबंधित स्तर पर जवाबदेही तय की जा सकेगी।
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड के आवेदनों पर विशेष निगरानी
बिहार स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को अधिकतम 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण उपलब्ध कराया जाता है। ऐसे में आवेदन और दस्तावेजों के सत्यापन की प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण है। नई डिजिटल निगरानी व्यवस्था के बाद DRCC में आने वाले आवेदनों की स्थिति मुख्यालय से देखी जा सकेगी।
फर्जी दस्तावेज और दलाली पर भी नजर
DRCC में छात्रों के आवेदन का निबंधन करने के साथ-साथ दस्तावेजों का भौतिक सत्यापन भी किया जाता है। नई व्यवस्था के जरिए इस पूरी प्रक्रिया की निगरानी की जाएगी। फर्जी दस्तावेज के इस्तेमाल, आवेदन में अनियमितता या किसी तरह की दलाली से जुड़ी शिकायत मिलने पर कार्रवाई की प्रक्रिया को तेज किया जा सकेगा।
विभाग ने कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के डिजिटल सिस्टम के संचालन और रखरखाव के लिए एजेंसी का चयन भी कर लिया है। सिस्टम पूरी क्षमता से काम करने के बाद पटना से सभी जिलों की गतिविधियों की निगरानी संभव होगी।
छात्राओं, दिव्यांगों और थर्ड जेंडर को 1 प्रतिशत ब्याज
स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड योजना के तहत उच्च शिक्षा के लिए अधिकतम 4 लाख रुपये तक का शिक्षा ऋण मिलता है। छात्राओं, दिव्यांग और थर्ड जेंडर के लाभार्थियों के लिए ब्याज दर 1 प्रतिशत निर्धारित है। योजना का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा जारी रखने में आर्थिक मदद उपलब्ध कराना है।
स्वयं सहायता भत्ता योजना की भी होगी निगरानी
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के जरिए मुख्यमंत्री निश्चय स्वयं सहायता भत्ता योजना की भी निगरानी की जाएगी। इस योजना के तहत पात्र बेरोजगार युवाओं को रोजगार की तलाश के दौरान हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। अधिकतम दो वर्षों तक सहायता मिलने पर कुल 24 हजार रुपये तक की राशि प्राप्त हो सकती है।
इसके साथ ही कुशल युवा कार्यक्रम की गतिविधियों पर भी निगरानी रखी जाएगी। इस कार्यक्रम के तहत युवाओं को बेसिक कंप्यूटर ज्ञान, हिंदी और अंग्रेजी संवाद कौशल के साथ सॉफ्ट स्किल्स और लाइफ स्किल्स का प्रशिक्षण दिया जाता है। 10वीं और 12वीं पास युवाओं को इस कार्यक्रम का लाभ मिल सकता है।
पटना से तय होगी जिलों की जवाबदेही
कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के पूरी तरह सक्रिय होने के बाद स्टूडेंट क्रेडिट कार्ड, स्वयं सहायता भत्ता और कुशल युवा कार्यक्रम से जुड़े आवेदनों की प्रक्रिया पर मुख्यालय की सीधी नजर रहेगी। खासकर दस्तावेज सत्यापन, आवेदन के निबंधन और लंबित मामलों में देरी को लेकर जिलों से जवाब मांगा जा सकेगा।
नई डिजिटल निगरानी व्यवस्था का उद्देश्य योजनाओं में पारदर्शिता बढ़ाना, शिकायतों का तेजी से निपटारा करना और पात्र युवाओं को सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर उपलब्ध कराना है।
