पटना : बिहार विधान परिषद (MLC) चुनाव को लेकर सूबे की सियासत में जबरदस्त हलचल मच गई है। राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA) के भीतर सब कुछ ठीक होने के दावों के बीच राष्ट्रीय लोक मोर्चा (RLM) प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा के एक कदम ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है। चर्चा है कि जेडीयू उम्मीदवार के खिलाफ उपेंद्र कुशवाहा के करीबी नेता की चुनावी मैदान में एंट्री से एनडीए के भीतर आंतरिक खींचतान सतह पर आ गई है।
जेडीयू कैंडिडेट के सामने सीधी चुनौती
विधान परिषद चुनाव में सीट शेयरिंग और उम्मीदवारी को लेकर गठबंधन के दलों में खींचतान कोई नई बात नहीं है, लेकिन जेडीयू प्रत्याशी के सामने कुशवाहा खेमे से ताल ठोकने की रणनीति ने चुनाव को बेहद दिलचस्प बना दिया है। राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यदि यह ‘फ्रेंडली फाइट’ के नाम पर वोट काटने की रणनीति साबित होती है, तो इसका सीधा असर जेडीयू के कोर वोट बैंक (खासकर लव-कुश समीकरण) पर पड़ सकता है।
बगावत या दबाव की रणनीति?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, इस कदम के पीछे दो मुख्य वजहें मानी जा रही हैं:
- सीट शेयरिंग और वादों का असंतोष: पिछले कुछ समय से एमएलसी सीटों और सरकार में उचित भागीदारी को लेकर कुशवाहा खेमे में नाराजगी की खबरें आती रही हैं।
- जमीनी पकड़ का शक्ति प्रदर्शन: आगामी चुनावों से पहले अपनी पार्टी की संगठनात्मक ताकत और कैडर की मौजूदगी दर्ज कराने के लिए कुशवाहा अपनी स्वतंत्र लाइन दिखाना चाहते हैं।
जेडीयू खेमे में सतर्कता
इस अप्रत्याशित घटनाक्रम के बाद जेडीयू नेतृत्व भी सतर्क हो गया है। पार्टी के रणनीतिकार डैमेज कंट्रोल और वोट बिखराव को रोकने के उपायों में जुट गए हैं। वहीं, विपक्षी खेमा इस स्थिति को ‘एनडीए का अंतर्कलह’ बताते हुए तंज कस रहा है।
अब देखना दिलचस्प होगा कि क्या शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद उम्मीदवार को पीछे हटाया जाता है या फिर यह मुकाबला एनडीए के दो दलों के बीच सीधी नूराकुश्ती का रूप लेगा।
