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ज्ञानेश कुमार के निलंबन पर सुप्रीम कोर्ट का अंतरिम आदेश से इनकार, केंद्र और निर्वाचन आयोग को नोटिस

नई दिल्ली : उच्चतम न्यायालय ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को निलंबित करने का एकतरफा अंतरिम आदेश जारी करने से इनकार कर दिया है। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली बेंच ने कहा कि विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े कई फैसले एकतरफा लिए जाने के आरोपों पर पहले चुनाव आयोग और अन्य संबंधित पक्षों का जवाब मांगा जाना चाहिए। उच्चतम न्यायालय ने केंद्र सरकार, निर्वाचन आयोग और ज्ञानेश कुमार को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया है।

याचिकाकर्ता की ओर से पेश वरिष्ठ वकील मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि नागरिकों के वोटिंग अधिकार खतरे में हैं और मुख्य निर्वाचन आयुक्त पक्षपात कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दिल्ली में यह वोटर्स का 30 प्रतिशत है। बंगाल में यह वोटर्स का 25 प्रतिशत था। अपीलेट ट्रिब्यूनल के पास 16 लाख अपीलें लंबित हैं। उन लोगों को पहले ही एक चुनाव प्रक्रिया से बाहर रखा जा चुका है। अब एक और चुनाव आ गया है।

मेनका गुरुस्वामी ने कहा कि यह किसी खास राज्य तक सीमित नहीं है। राज्य का इस्तेमाल सिर्फ एक उदाहरण के तौर पर किया जा रहा है। हम हाल के चुनावों पर ध्यान दिला रहे हैं। यह मुख्य निर्वाचन आयुक्त और चुनाव आयुक्तों के राष्ट्रीय कामकाज और चुनाव आयोग के कामकाज से जुड़ा मामला है। उस गैर-कानूनी काम को एक असंवैधानिक कानून के जरिए बचाया जा रहा है। इस तरह के पक्षपाती व्यवहार के लिए क्या सजा है? मैं खुद से यह सवाल पूछती हूं। हम इस देश में आजाद और निष्पक्ष चुनावों के माहौल में बड़े हुए हैं। आज वे नहीं रहे। मैं इन मांगों पर कायम हूं, हर एक मांग पर। यह एक राष्ट्रीय समस्या है।

सुनवाई के दौरान मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने साफ किया कि उच्चतम न्यायालय ने विशेष गहन पुनरीक्षण के दौरान वोटर लिस्ट में नाम शामिल करने के लिए इस्तेमाल होने वाले फॉर्म 6 में किसी भी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है। यह बात उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ मुकदमा चलाने की मांग वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान कही।

याचिका में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही करने की मांग की गई है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर ज्ञानेश कुमार ने अपने संवैधानिक दायित्यों का निर्वहन नहीं किया। याचिका में कहा गया है कि एसआईआर के दौरान लिए गए फैसले और सॉफ्टवेयर में बदलाव करने को लेकर दोनों चुनाव आयुक्तों की कोई सहमति नहीं ली गई।

याचिका में कहा गया है कि विशेष गहन पुनरीक्षण से संबंधित निर्वाचन आयोग के सभी फैसलों को गैरकानूनी करार दिया जाए और फॉर्म 6 को मूल स्वरुप में ही बहाल किया जाए। याचिका में मांग की गई है कि एसआईआर के दौरान करीब 13 करोड़ मतदाताओं का नाम काटे जाने की एसआईटी से जांच कराई जाए। याचिका में मांग की गई है कि ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आपराधिक कार्यवाही शुरु की जाए। इसके अलावा उप चुनाव आयुक्त मनीष गर्ग और निर्वाचन आयोग की आईटी प्रमुख सीमा खन्ना के खिलाफ भी आपराधिक कार्यवाही शुरु की जाए।

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