पटना : बिहार विधान परिषद की शिक्षक और स्नातक निर्वाचन क्षेत्र की आठ सीटों पर होने वाले चुनाव को लेकर सियासी गतिविधियां तेज हो गई हैं। इसी बीच भाजपा के वरिष्ठ नेता नितिन नबीन के पटना पहुंचने से चुनावी रणनीति को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं। माना जा रहा है कि इस दौरान आगामी MLC चुनाव को लेकर संगठनात्मक तैयारियों और गठबंधन के भीतर बेहतर समन्वय पर चर्चा हो सकती है।
बिहार में विधान परिषद की आठ सीटों के लिए 23 अक्टूबर 2026 को मतदान होना है। इनमें चार स्नातक और चार शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र शामिल हैं। एनडीए की ओर से भाजपा और जदयू ने अपने-अपने उम्मीदवार मैदान में उतारे हैं।
पटना स्नातक सीट पर बढ़ी राजनीतिक हलचल
इन सीटों में पटना स्नातक निर्वाचन क्षेत्र पर विशेष नजर है। यहां जदयू ने मौजूदा एमएलसी नीरज कुमार को उम्मीदवार बनाया है। वहीं, जनसुराज के प्रत्याशी अनुज कुमार सिंह को जदयू विधायक अनंत सिंह का समर्थन मिलने से मुकाबले के राजनीतिक समीकरण पर चर्चा बढ़ गई है।
अनंत सिंह और नीरज कुमार के बीच लंबे समय से चले आ रहे राजनीतिक मतभेद इस चुनाव में भी सामने आए हैं। अनंत सिंह ने सार्वजनिक तौर पर नीरज कुमार के विरोध में अनुज सिंह के समर्थन की बात कही है। इस घटनाक्रम ने जदयू के भीतर भी रणनीतिक चर्चा को तेज किया है।
NDA के सामने संगठनात्मक तालमेल की चुनौती
एमएलसी चुनाव को लेकर एनडीए के घटक दल पहले ही संयुक्त रणनीति पर बैठक कर चुके हैं। भाजपा कार्यालय में हुई बैठक में भाजपा, जदयू, लोजपा (रामविलास), आरएलएम और हम के नेताओं ने चुनावी तैयारियों, संगठनात्मक समन्वय और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं के बीच बेहतर तालमेल पर चर्चा की थी।
ऐसे में नितिन नबीन का पटना दौरा चुनावी तैयारियों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, उनके दौरे में किन मुद्दों पर अंतिम रूप से चर्चा होगी, इसकी आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी।
8 सीटों पर मुकाबला
बिहार विधान परिषद की जिन आठ सीटों पर चुनाव होना है, उनमें पटना स्नातक, पटना शिक्षक, दरभंगा स्नातक, दरभंगा शिक्षक, तिरहुत स्नातक, तिरहुत शिक्षक, कोसी स्नातक और सारण शिक्षक सीट शामिल हैं।
एनडीए ने इन सीटों पर घटक दलों के बीच तालमेल के साथ चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई है। दूसरी ओर, विपक्षी दल भी अपने-अपने समीकरण को मजबूत करने में जुटे हैं। पटना स्नातक सीट पर उम्मीदवारों के बीच मुकाबले और गठबंधन के भीतर सामने आए मतभेदों ने इसे चुनाव की चर्चित सीटों में शामिल कर दिया है।
अब नजर इस बात पर है कि नितिन नबीन के पटना दौरे के बाद एनडीए की चुनावी रणनीति में क्या बदलाव या नई पहल सामने आती है और पटना स्नातक सीट पर गठबंधन अपने संगठनात्मक समीकरण को किस तरह साधता है।
