पटना : बिहार बीजेपी में संगठन के स्तर पर एक अहम सवाल अब चर्चा का विषय बनता जा रहा है। प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी के पद संभालने के करीब दस महीने बाद भी पार्टी के मीडिया प्रभाग का गठन नहीं हो पाया है। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि आखिर पार्टी के इस महत्वपूर्ण विंग को अब तक जगह क्यों नहीं मिल पाई और क्या मीडिया प्रभाग प्रदेश बीजेपी की प्राथमिकता सूची से बाहर हो गया है?
बीजेपी जैसी बड़ी राजनीतिक पार्टी के लिए मीडिया प्रभाग की भूमिका काफी अहम मानी जाती है। पार्टी के कार्यक्रमों, नीतियों, सरकार की उपलब्धियों और संगठन से जुड़े फैसलों को मीडिया के माध्यम से जनता तक पहुंचाने में यह विभाग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसके अलावा विपक्ष के आरोपों का जवाब देने और पार्टी का पक्ष मजबूती से रखने की जिम्मेदारी भी मीडिया टीम पर होती है।
बिहार में लगातार राजनीतिक गतिविधियों के बीच मीडिया प्रभाग का गठन नहीं होना पार्टी के भीतर और बाहर चर्चा का विषय बन गया है। खासकर ऐसे समय में जब प्रदेश की राजनीति में बयानबाजी और आरोप-प्रत्यारोप तेज हैं, पार्टी के आधिकारिक मीडिया विंग की अनुपस्थिति को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
दस महीने बाद भी इंतजार
प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने जब पार्टी की कमान संभाली थी, तब संगठन के पुनर्गठन और नई टीम को लेकर काफी उम्मीदें थीं। माना जा रहा था कि अलग-अलग प्रकोष्ठों और विभागों के साथ मीडिया प्रभाग का भी जल्द गठन किया जाएगा। लेकिन करीब दस महीने गुजरने के बावजूद यह प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी है।
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक, चुनावी राजनीति में मीडिया मैनेजमेंट और संचार तंत्र की भूमिका लगातार बढ़ी है। ऐसे में किसी बड़े राजनीतिक दल के प्रदेश स्तर पर मीडिया प्रभाग का लंबे समय तक गठन नहीं होना कई सवाल खड़े करता है।
संगठन के लिए क्यों अहम है मीडिया प्रभाग?
मीडिया प्रभाग केवल प्रेस रिलीज जारी करने तक सीमित नहीं होता। पार्टी की रणनीति को मीडिया तक पहुंचाना, नेताओं के कार्यक्रमों की जानकारी देना, प्रेस कॉन्फ्रेंस और बाइट्स का समन्वय करना तथा विरोधियों के आरोपों पर पार्टी का पक्ष सामने रखना इसकी अहम जिम्मेदारियों में शामिल है।
बिहार जैसे राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण राज्य में बीजेपी के लिए यह विंग और भी महत्वपूर्ण हो जाता है। ऐसे में अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि पार्टी कब अपने मीडिया प्रभाग का औपचारिक गठन करती है और इसकी जिम्मेदारी किसे सौंपी जाती है।
उठ रहे हैं कई सवाल
मीडिया प्रभाग के गठन में हो रही देरी के बीच पार्टी के अंदर यह सवाल भी उठ रहा है कि क्या नेतृत्व की प्राथमिकताओं में इस विंग को पर्याप्त महत्व नहीं मिल रहा है? हालांकि, पार्टी की ओर से इस देरी को लेकर कोई स्पष्ट आधिकारिक कारण सामने नहीं आया है।
अब देखना होगा कि बिहार बीजेपी नेतृत्व इस महत्वपूर्ण संगठनात्मक जिम्मेदारी को कब तक पूरा करता है और नई मीडिया टीम को किस स्वरूप में सामने लाया जाता है।







