पटना: जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर (PK) ने विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को लेकर हो रहे विरोध और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर चिंता जताते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग की। प्रशांत किशोर ने बिहार में मतदान से पहले पैसे बांटकर वोट खरीदने का आरोप भी लगाया और कहा कि जब तक चुनाव प्रक्रिया पारदर्शी नहीं होगी, तब तक इसका विरोध जारी रहेगा।
प्रशांत किशोर के मुताबिक, पिछले 8-10 वर्षों से चुनाव आयोग की विश्वसनीयता पर सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि बिहार में मतदान से दो दिन पहले तक वोट खरीदने की गतिविधियां होती रहीं और चुनाव आयोग मूकदर्शक बना रहा। ये आरोप प्रशांत किशोर ने लगाए हैं।
चुनाव में बढ़ते खर्च पर भी उठाए सवाल
चुनाव को खर्चीला बनाने के आरोपों पर जवाब देते हुए प्रशांत किशोर ने कहा कि जन सुराज और उनकी पहल ने लोकतंत्र को मजबूत करने का काम किया है। उन्होंने कहा कि पहले चुनावों में नेता ‘लालू जी का जंगलराज आ जाएगा’ जैसे मुद्दों के सहारे वोट मांगते थे, लेकिन अब जनता अपने अधिकारों और जरूरतों को लेकर सवाल कर रही है।
प्रशांत किशोर ने दावा किया कि सरकार को चुनाव के दौरान करीब 20 हजार करोड़ रुपये खर्च करने पड़े। उन्होंने कहा कि उनकी वजह से सरकार को अधिक मेहनत करनी पड़ी और खर्च भी करना पड़ा। उन्होंने यह भी कहा कि जन सुराज ने लोगों को यह समझाने का प्रयास किया है कि यदि वे वोट के बदले 10 हजार रुपये मांगेंगे तो उन्हें यह मिल सकता है, और यदि वे शिक्षा तथा रोजगार की मांग करेंगे तो उन मुद्दों पर भी सरकार से जवाब मांग सकते हैं।
नीरज कुमार के बयान पर प्रशांत किशोर का पलटवार
जदयू नेता नीरज कुमार के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रशांत किशोर ने तीखी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि नीरज कुमार अपनी औकात से ऊपर उठकर बोलने लगे थे और उन्होंने उनका राजनीतिक अंत सुनिश्चित कर दिया है।
प्रशांत किशोर ने आगे दावा किया कि यदि मुख्यमंत्री नीतीश कुमार मीडिया के सामने आकर एक मिनट के लिए कह दें कि नीरज कुमार उनके साथ हैं और उन्हें उनका समर्थन प्राप्त है, तो वह अपना उम्मीदवार वापस लेने के लिए तैयार हैं।
चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता पर जोर
प्रशांत किशोर ने कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता और चुनाव प्रक्रिया की पारदर्शिता लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण है। उन्होंने दोहराया कि जब तक चुनाव प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों का समाधान नहीं होगा और पारदर्शिता सुनिश्चित नहीं की जाएगी, तब तक विरोध जारी रहेगा।
प्रशांत किशोर के इन बयानों से बिहार की राजनीति में चुनाव आयोग, चुनावी खर्च और जदयू नेताओं के बीच जारी बयानबाजी को लेकर बहस तेज होने की संभावना है। हालांकि, चुनाव आयोग पर लगाए गए आरोपों और चुनावी खर्च से जुड़े दावों की स्वतंत्र पुष्टि इस खबर में नहीं की गई है।
