समस्तीपुर: बिहार के समस्तीपुर जिले के रेलवे कॉलोनी में पले-बढ़े युवा इंजीनियर संजय कुमार ने अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। उनके नेतृत्व में हैदराबाद की डीपटेक कंपनी ईओएन स्पेस लैब्स ने महज 502 ग्राम वजन वाला मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा ‘मीरा’ विकसित किया है। इस कैमरे को स्पेसएक्स के फाल्कन-9 रॉकेट के ट्रांसपोर्टर-18 अभियान के माध्यम से अंतरिक्ष में भेजा गया है। यह कैमरा पृथ्वी की तस्वीरें लेने और विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े महत्वपूर्ण आंकड़े जुटाने में सक्षम है।
समस्तीपुर से निकलकर अंतरिक्ष तकनीक के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाने वाले संजय कुमार की यह उपलब्धि बिहार के युवा इंजीनियरों के लिए प्रेरणादायक मानी जा रही है।
502 ग्राम का कैमरा नौ स्पेक्ट्रल बैंड में करेगा काम
‘मीरा’ एक मल्टीस्पेक्ट्रल इमेजिंग कैमरा है, जिसे कम वजन और उच्च कार्यक्षमता को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। इसे अमेरिका के कैलिफोर्निया स्थित वैंडेनबर्ग स्पेस फोर्स बेस से लॉन्च किया गया। यह कैमरा टेकमी2 स्पेस के एमओआइ-1ए कक्षीय उपग्रह के साथ जोड़ा गया है।
कैमरे को अंतरिक्ष की कठिन परिस्थितियों और रॉकेट के प्रक्षेपण के दौरान होने वाले तेज कंपन को सहन करने के लिए डिजाइन किया गया है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि केवल 502 ग्राम वजन होने के बावजूद यह नौ अलग-अलग स्पेक्ट्रल बैंड में आंकड़े जुटा सकता है। इससे पृथ्वी की सतह और पर्यावरण से जुड़ी विभिन्न जानकारियों का विश्लेषण करने में मदद मिलेगी।
खेती से लेकर आपदा प्रबंधन तक होगा इस्तेमाल
‘मीरा’ कैमरे से मिलने वाले आंकड़े कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में उपयोगी साबित हो सकते हैं। कृषि क्षेत्र में इसकी मदद से फसलों की स्थिति का आकलन करने और जमीन में नमी से संबंधित जानकारी जुटाने में सहायता मिल सकती है।
इसके अलावा प्राकृतिक संसाधनों की निगरानी, जंगलों में होने वाले बदलावों का अध्ययन और पर्यावरण की स्थिति का आकलन करने में भी इस तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है। प्राकृतिक आपदाओं से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी और नुकसान का आकलन करने में भी ऐसे कैमरों से प्राप्त तस्वीरें और आंकड़े महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
संजय कुमार और उनकी टीम भारतीय नौसेना के लिए आधुनिक निगरानी उपकरण विकसित करने की दिशा में भी काम कर रही है। उनकी कंपनी को आईआईटी मद्रास ने भारत इनोवेट्स-2026 के लिए चुना था। इसके तहत संजय ने फ्रांस की राजधानी पेरिस में भारतीय डीपटेक और एयरोस्पेस तकनीक का प्रतिनिधित्व किया।
आईआईटी मद्रास से हासिल की उच्च शिक्षा
संजय कुमार का बचपन समस्तीपुर की रेलवे कॉलोनी में बीता। उनके पिता शिव बचन मंडल रेल प्रबंधक कार्यालय में कार्यरत थे। संजय ने अपनी शुरुआती पढ़ाई समस्तीपुर के सेंट्रल पब्लिक स्कूल से पूरी की। वर्ष 2006 में माध्यमिक और 2008 में उच्चतर माध्यमिक परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने आईआईटी प्रवेश परीक्षा की तैयारी की।
बाद में उन्होंने तिरुवनंतपुरम स्थित भारतीय अंतरिक्ष विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संस्थान से एवियोनिक्स में बीटेक किया। इसके बाद आईआईटी मद्रास से प्रकाशिकी एवं प्रकाश तकनीक में परास्नातक की डिग्री हासिल की।
उन्होंने उन्नत प्रकाशिकी और इमेजिंग तकनीक के क्षेत्र में आठ वर्षों से अधिक समय तक शोध किया। इस दौरान उन्होंने एलवी प्रसाद नेत्र संस्थान और अमेरिका के रोचेस्टर चिकित्सा केंद्र से जुड़े संस्थानों में काम किया।
2022 में स्थापित की ईओएन स्पेस लैब्स
वर्ष 2022 में संजय कुमार ने उज्जैन के पुनीत बदेका और मनोज कुमार गड्डम के साथ मिलकर हैदराबाद में ईओएन स्पेस लैब्स की स्थापना की। वह कंपनी के सह-संस्थापक और मुख्य कार्यकारी अधिकारी हैं। उनकी जिम्मेदारी प्रकाशीय तंत्र के डिजाइन और विकास से जुड़ी है।
समस्तीपुर की रेलवे कॉलोनी से शुरू हुआ संजय कुमार का सफर अब अंतरिक्ष तकनीक तक पहुंच गया है। उनकी यह उपलब्धि दिखाती है कि वैज्ञानिक शोध, तकनीकी कौशल और लगातार मेहनत के जरिए भारतीय इंजीनियर अंतरिक्ष क्षेत्र में नए अवसर पैदा कर रहे हैं।
