हाजीपुर : शिक्षक संवाद कार्यक्रम में पहुंचे जन सुराज के संस्थापक प्रशांत किशोर ने शिक्षकों, बेरोजगारी और आगामी स्नातक निर्वाचन को लेकर कई बड़े बयान दिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को सातवां वेतनमान मिलना चाहिए और वित्त रहित शिक्षकों की दशकों से चली आ रही समस्याओं का समाधान होना चाहिए। प्रशांत किशोर ने कहा कि शिक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के लिए शिक्षकों की मांगों पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
प्रशांत किशोर ने स्नातक निर्वाचन में जन सुराज के उम्मीदवार की जीत को लेकर भी बड़ा दावा किया। उन्होंने कहा कि अगर जन सुराज का स्नातक उम्मीदवार जीतता है, तो 10 हजार पढ़े-लिखे बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने की जिम्मेदारी जन सुराज की होगी। उनके मुताबिक, यह सिर्फ चुनाव जीतने का मुद्दा नहीं है, बल्कि युवाओं के भविष्य और रोजगार से जुड़ा सवाल है।
PK ने कहा कि इस बार लोगों ने सोच लिया है कि वे न ऊपर देखकर वोट करेंगे और न नीचे देखकर, बल्कि अपने बच्चों के भविष्य को ध्यान में रखकर मतदान करेंगे। उन्होंने कहा कि मतदाता सातवें वेतनमान, वित्त रहित शिक्षकों की समस्याओं के समाधान और रोजगार जैसे मुद्दों पर वोट देंगे। प्रशांत किशोर ने दावा किया कि अब जनता जाति और दूसरी पारंपरिक राजनीतिक पहचान से आगे बढ़कर शिक्षा, रोजगार और अपने परिवार के भविष्य से जुड़े सवालों को प्राथमिकता देना चाहती है।
जीतन राम मांझी के बयान पर PK का पलटवार
दिल्ली में प्रदर्शनकारियों को तिलचट्टा कहे जाने को लेकर केंद्रीय मंत्री जीतन राम मांझी पर भी प्रशांत किशोर ने निशाना साधा। PK ने कहा कि जीतन राम मांझी के शब्द चयन और व्यक्तित्व को कोई गंभीरता से नहीं लेता। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में लोगों को अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन करने का अधिकार है और सरकार आंदोलनों को पूरी तरह दबा या रोक नहीं सकती।
प्रशांत किशोर ने कहा कि सरकार दो, चार या पांच दिनों तक सुरक्षा बलों की तैनाती करके लोगों को घरों से निकलने से रोक सकती है, लेकिन इससे आंदोलन खत्म नहीं हो जाता। उन्होंने दिल्ली में बड़ी संख्या में अर्धसैनिक बलों की तैनाती का जिक्र करते हुए कहा कि 40 हजार अर्धसैनिक बलों को सड़कों पर उतारना आंदोलन की ताकत और सरकार के डर को दिखाता है।
PK के इस बयान के बाद शिक्षक संवाद कार्यक्रम में शिक्षा, रोजगार और आंदोलन से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में आ गए। एक ओर उन्होंने शिक्षकों के वेतनमान और वित्त रहित शिक्षकों की समस्याओं को उठाया, तो दूसरी ओर स्नातक उम्मीदवार की जीत के बाद 10 हजार बेरोजगार युवाओं को नौकरी दिलाने की जिम्मेदारी लेने की बात कही। वहीं, जीतन राम मांझी पर उनकी टिप्पणी ने राजनीतिक बहस को भी हवा दी।
