पटना : बिहार की राजनीति में लालू परिवार एक बार फिर चर्चा के केंद्र में है। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) सुप्रीमो लालू प्रसाद यादव की बेटी रोहिणी आचार्य की सक्रिय राजनीति में वापसी को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं। चर्चा है कि पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने रोहिणी आचार्य को पार्टी में अहम जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत उन्हें RJD का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष बनाए जाने की बात सामने आ रही है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी तेजस्वी यादव की सहमति और पार्टी की ओर से आधिकारिक घोषणा का इंतजार है।
राबड़ी देवी के प्रस्ताव से बढ़ी राजनीतिक हलचल
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, राबड़ी देवी ने राष्ट्रीय उपाध्यक्ष पद छोड़कर अपनी जगह रोहिणी आचार्य को यह जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव रखा है। इस संभावित बदलाव को लेकर लालू प्रसाद यादव, तेजस्वी यादव और परिवार के अन्य सदस्यों के बीच चर्चा होने की बात कही जा रही है।
हालांकि, अभी तक इस प्रस्ताव पर पार्टी की ओर से कोई औपचारिक फैसला सार्वजनिक नहीं किया गया है। ऐसे में रोहिणी आचार्य को संगठन में जिम्मेदारी मिलना फिलहाल संभावित घटनाक्रम ही है।
करीब एक साल बाद पटना लौटीं रोहिणी आचार्य
रोहिणी आचार्य अक्टूबर 2026 की शुरुआत में करीब 11 महीने बाद सिंगापुर से बिहार लौटी थीं। पटना एयरपोर्ट पर उनके स्वागत के लिए लालू प्रसाद यादव, राबड़ी देवी और उनकी बड़ी बहन मीसा भारती मौजूद थीं।
रोहिणी की वापसी को लेकर पारिवारिक और राजनीतिक, दोनों स्तरों पर चर्चाएं शुरू हो गईं। हालांकि, रोहिणी आचार्य ने अपने पटना आने को पारिवारिक मुलाकात बताया था। उन्होंने कहा था कि वह अपने पिता के बुलावे पर उनसे मिलने आई हैं और उनकी यात्रा को राजनीतिक नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए।
तेजस्वी यादव की सहमति पर टिकी नजरें
रोहिणी आचार्य को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी देने की चर्चा के बीच अब तेजस्वी यादव के रुख पर नजरें टिकी हैं। तेजस्वी यादव RJD के कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं और पार्टी के संगठनात्मक फैसलों में उनकी भूमिका महत्वपूर्ण है।
यदि रोहिणी को राष्ट्रीय उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी देने का प्रस्ताव स्वीकार किया जाता है, तो यह पार्टी संगठन में एक महत्वपूर्ण बदलाव होगा। हालांकि, इस संबंध में अंतिम निर्णय और उसकी आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।
पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने की चर्चा
रोहिणी आचार्य की राजनीतिक गतिविधियों को लेकर यह भी चर्चा है कि वह RJD के पुराने नेताओं और कार्यकर्ताओं से संपर्क बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। पार्टी के पुराने चेहरों को फिर से सक्रिय करने और संगठन से जुड़े लोगों के साथ संवाद स्थापित करने की उनकी संभावित भूमिका को भी अहम माना जा रहा है।
रोहिणी वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में सारण सीट से RJD की उम्मीदवार थीं, लेकिन उन्हें जीत नहीं मिली थी। इसके बाद बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजों और परिवार के भीतर कथित मतभेदों के बीच उन्होंने सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी।
क्या लालू परिवार के रिश्तों में भी आएगी नई गर्मजोशी?
रोहिणी आचार्य की पटना वापसी के बाद लालू परिवार के भीतर संबंधों को लेकर भी चर्चाएं हुई हैं। पिछले वर्ष सामने आए कथित पारिवारिक मतभेदों के कारण रोहिणी और तेजस्वी के रिश्ते राजनीतिक सुर्खियों में रहे थे।
अब राबड़ी देवी की ओर से रोहिणी को पार्टी में अहम जिम्मेदारी देने की चर्चा ने इन अटकलों को और बढ़ा दिया है। हालांकि, परिवार के रिश्तों में पूरी तरह सुधार हुआ है या नहीं, इस बारे में कोई स्पष्ट आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
