पटना/वैशाली : बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में गंगा नदी में नाव पलटने की दर्दनाक घटना ने पूरे प्रदेश को झकझोर कर रख दिया है। इस हादसे में 13 लोगों की मौत हो गई, जिनमें अधिकांश बच्चे शामिल हैं। घटना के बाद राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। राजद सांसद मीसा भारती ने हादसे को लेकर राज्य सरकार और प्रशासन पर निशाना साधते हुए लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उन्होंने बिहार की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा, ‘बिहार में अंधेर नगरी, चौपट राजा।’
नाव हादसे के बाद सरकार पर सवाल
राघोपुर के रामपुर श्यामचंद पंचायत के पास मंगलवार रात नाव पलटने की घटना हुई। बताया जा रहा है कि नाव पर सवार लोग गंगा नदी पार कर दूसरे गांव में भोज में शामिल होने जा रहे थे। इसी दौरान नाव बीच नदी में पलट गई और कई लोग डूब गए। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई। स्थानीय लोगों ने अंधेरे के बीच बचाव अभियान चलाया और डूब रहे लोगों को बाहर निकालने की कोशिश की।
इस घटना में 13 लोगों की जान चली गई, जबकि छह लोगों को सुरक्षित निकालकर इलाज के लिए पटना के नालंदा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (NMCH) भेजा गया। मृतकों में नौ बच्चियां और चार बच्चे बताए गए हैं।
जर्जर नाव को लेकर ग्रामीणों ने उठाए सवाल
हादसे के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने नाव की स्थिति को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। ग्रामीणों का दावा है कि नाव काफी जर्जर हो चुकी थी और इसकी शिकायत पहले भी संबंधित अधिकारियों से की गई थी। इसके बावजूद नाव के इस्तेमाल पर रोक लगाने या उसकी मरम्मत कराने के लिए समय रहते कदम नहीं उठाए गए।
इन आरोपों के बाद प्रशासनिक निगरानी और नदी पार करने के लिए इस्तेमाल होने वाली नावों की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। हालांकि, हादसे के वास्तविक कारणों और कथित लापरवाही की जिम्मेदारी की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
प्रशासन ने शुरू की कार्रवाई
हादसे के बाद वैशाली की जिलाधिकारी वर्षा सिंह ने घटनास्थल पर पहुंचकर राहत एवं बचाव कार्यों का जायजा लिया। प्रशासन ने राघोपुर के अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा है। साथ ही, अगले आदेश तक दोनों अधिकारियों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया है। अधिकारियों से रात में नाव के परिचालन और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर जवाब मांगा गया है।
मुआवजे का ऐलान, जांच पर टिकी नजरें
हादसे में जान गंवाने वाले लोगों के परिजनों को राज्य सरकार की ओर से चार-चार लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की जानकारी दी गई है। वहीं, प्रधानमंत्री राहत कोष से मृतकों के परिजनों के लिए दो-दो लाख रुपये की सहायता की घोषणा की गई है। प्रशासन की ओर से हादसे के कारणों की जांच की जा रही है।
राघोपुर नाव हादसे ने एक बार फिर बिहार के नदी और दियारा क्षेत्रों में सुरक्षित आवागमन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि यदि नाव की जर्जर स्थिति की शिकायतें पहले से मिल रही थीं, तो समय रहते कार्रवाई क्यों नहीं हुई। हादसे की जांच में यह स्पष्ट होना जरूरी है कि दुर्घटना किन परिस्थितियों में हुई और सुरक्षा में चूक के लिए कौन जिम्मेदार है।






