गया : बिहार के गया में आयोजित पितृपक्ष मेले के दौरान सफाईकर्मी जितेंद्र मांझी ने अपनी ईमानदारी और कर्तव्यनिष्ठा से एक मिसाल पेश की है। लाखों रुपये का कीमती लॉकेट मिलने के बाद उसे अपने पास रखने के बजाय महिला को वापस लौटाकर उन्होंने लोगों का दिल जीत लिया। उनके इस सराहनीय कार्य की चर्चा अब पूरे बिहार में हो रही है।
पानी में गिर गया था महिला का कीमती लॉकेट
दरअसल, पितृपक्ष मेले के दौरान अपने पूर्वजों का पिंडदान करने गया पहुंची एक महिला का कीमती लॉकेट पानी में गिर गया था। लॉकेट खो जाने के बाद महिला काफी परेशान हो गई। कीमती आभूषण को वापस पाने की उम्मीद में सफाईकर्मी जितेंद्र मांझी ने उसे खोजने का जिम्मा उठाया।
उन्होंने घंटों तक पानी में तलाश की और आखिरकार लॉकेट खोज निकाला। इसके बाद उन्होंने बिना किसी लालच के उसे संबंधित महिला को वापस सौंप दिया। लॉकेट मिलने से महिला को बड़ी राहत मिली और जितेंद्र मांझी की ईमानदारी की हर ओर सराहना होने लगी।
IAS और IPS अधिकारियों ने किया सम्मानित
जितेंद्र मांझी के इस सराहनीय कार्य से प्रभावित होकर IAS डॉ. गगन कुमार और IPS सुशील कुमार ने उन्हें सम्मानित किया। अधिकारियों ने उनके कार्य की प्रशंसा करते हुए ईमानदारी, मानवीय संवेदना और कर्तव्य के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
जितेंद्र मांझी की इस पहल ने यह साबित कर दिया कि ईमानदारी किसी पद, प्रतिष्ठा या आर्थिक स्थिति की मोहताज नहीं होती। एक सफाईकर्मी ने अपने आचरण से समाज के सामने ऐसा उदाहरण रखा, जो हर व्यक्ति को प्रेरित करता है।
ईमानदारी के आगे छोटा-बड़ा कोई पद नहीं
आज के दौर में जब छोटी-सी लालच के कारण लोग अपने नैतिक मूल्यों से समझौता कर लेते हैं, ऐसे में जितेंद्र मांझी का यह कदम समाज के लिए प्रेरणादायक है। उनका कार्य बताता है कि इंसान की असली पहचान उसके पद से नहीं, बल्कि उसके चरित्र और कर्मों से होती है।
गया के पितृपक्ष मेले में जितेंद्र मांझी ने अपनी ईमानदारी से यह संदेश दिया कि मानवता और नैतिकता आज भी समाज की सबसे बड़ी पूंजी हैं। उनकी यह मिसाल लंबे समय तक लोगों को ईमानदारी के रास्ते पर चलने की प्रेरणा देती रहेगी।
