वैशाली: बिहार के वैशाली जिले के राघोपुर में हुए दर्दनाक नाव हादसे के बाद जिला प्रशासन ने प्रशासनिक कार्रवाई तेज कर दी है। हादसे में 13 बच्चों की मौत के बाद राघोपुर के अंचलाधिकारी (CO) दीपक कुमार को जिला जन शिकायत कोषांग में प्रतिनियुक्त कर दिया गया है। वहीं, पातेपुर के अंचलाधिकारी प्रभात को राघोपुर अंचल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। इस संबंध में 16 अक्टूबर 2026 को आदेश जारी किया गया।
इससे पहले जिला प्रशासन ने हादसे के बाद रात में निजी नाव के परिचालन को लेकर राघोपुर के अंचलाधिकारी और थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगा था। साथ ही, अगले आदेश तक दोनों अधिकारियों के वेतन भुगतान पर रोक लगाने का निर्देश दिया गया था।
राघोपुर नाव हादसे में 13 बच्चों की मौत
यह दर्दनाक घटना 13 अक्टूबर 2026 की रात करीब 8:30 बजे राघोपुर थाना क्षेत्र में हुई थी। निजी नाव डूबने से नौ बच्चियों और चार बच्चों समेत कुल 13 बच्चों की जान चली गई थी। हादसे के बाद इलाके में अफरा-तफरी मच गई और जिला प्रशासन ने राहत एवं बचाव अभियान शुरू कराया।
घटनास्थल पर एसडीआरएफ की टीम ने बचाव अभियान चलाया। हादसे में छह लोगों, जिनमें चार बच्चे और दो वयस्क शामिल थे, को बचाया गया। उन्हें बेहतर इलाज के लिए पटना के एनएमसीएच भेजा गया था।
CO दीपक कुमार की जगह प्रभात को अतिरिक्त जिम्मेदारी
जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश के अनुसार, राघोपुर के सीओ दीपक कुमार को जिला जन शिकायत कोषांग में प्रतिनियुक्त किया गया है। वहीं, पातेपुर के सीओ प्रभात को राघोपुर अंचल का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है।
प्रभात को अविलंब कार्यभार संभालने और अंचल से संबंधित कार्यों का समय पर निष्पादन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया है। हादसे के बाद हुई इस प्रशासनिक कार्रवाई को घटना से जुड़ी जवाबदेही के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है। हालांकि, अधिकारियों के खिलाफ आगे की कार्रवाई उनके स्पष्टीकरण और प्रशासनिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
मृतक बच्चों के परिजनों को आर्थिक सहायता
जिला प्रशासन के अनुसार, हादसे में जान गंवाने वाले प्रत्येक बच्चे के परिजन को आपदा अनुग्रह अनुदान के तहत चार लाख रुपये दिए गए हैं। इसके अलावा कबीर अंत्येष्टि योजना के तहत तीन हजार रुपये और मुख्यमंत्री पारिवारिक लाभ योजना के तहत 20 हजार रुपये की सहायता उपलब्ध कराई गई है।
वहीं, प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से प्रत्येक मृतक के परिजन को दो लाख रुपये और इलाजरत प्रत्येक व्यक्ति को 50 हजार रुपये की सहायता देने की घोषणा की गई है।
रात में नाव परिचालन और सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
राघोपुर नाव हादसे के बाद रात में निजी नावों के परिचालन, सुरक्षा मानकों और निगरानी व्यवस्था को लेकर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। सीओ और थानाध्यक्ष से स्पष्टीकरण मांगने, वेतन भुगतान पर रोक लगाने तथा अंचलाधिकारी के प्रभार में बदलाव जैसे कदमों के बाद प्रशासनिक जवाबदेही का मुद्दा भी चर्चा में है।
अब आगे की कार्रवाई और जांच से यह स्पष्ट होगा कि हादसे के दौरान सुरक्षा व्यवस्था में कहां चूक हुई और संबंधित अधिकारियों की जिम्मेदारी किस हद तक तय होती है।
