पटना: बिहार के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के वेतन को लेकर शिक्षा विभाग ने स्थिति स्पष्ट की है। शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने कहा है कि राज्य के सभी पात्र शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन मिलेगा। उन्होंने वेतन घोटाले और करीब 9 लाख शिक्षाकर्मियों का वेतन रोके जाने से संबंधित खबर को बेबुनियाद और भ्रामक बताया है।
गुरुवार को जारी बयान में सचिव ने स्पष्ट किया कि राज्य सरकार या शिक्षा विभाग की ओर से वेतन भुगतान रोकने का कोई निर्णय नहीं लिया गया है। उन्होंने कहा कि वेतन और भत्तों का सत्यापन केवल एहतियात के तौर पर कराया जा रहा है। इसका उद्देश्य भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना और किसी भी तरह की गड़बड़ी की आशंका को दूर करना है।
वित्तीय अनियमितताओं की जांच जारी
शिक्षा विभाग के सचिव ने बताया कि राज्य के कुछ स्थानों से वित्तीय अनियमितताओं की शिकायतें और सूचनाएं मिली थीं। इन मामलों की विभागीय स्तर पर जांच कराई जा रही है। जांच के दौरान कुछ लोगों के खिलाफ कार्रवाई भी की गई है।
उन्होंने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं से जुड़े एक-दो मामलों के आधार पर पूरे राज्य के शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों के बारे में निष्कर्ष निकालना उचित नहीं है। विभाग इन मामलों को गंभीरता से लेते हुए जरूरी कदम उठा रहा है।
पारदर्शिता के लिए हो रहा सत्यापन
सचिव राजीव रौशन ने कहा कि वेतन और भत्तों के सत्यापन की प्रक्रिया का उद्देश्य भुगतान व्यवस्था को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाना है। इससे यह सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी कि वेतन का भुगतान सही पात्र व्यक्तियों को किया जाए और प्रक्रिया में किसी तरह की अनियमितता न हो।
उन्होंने दोहराया कि सत्यापन को वेतन रोकने के फैसले के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। विभाग की प्राथमिकता है कि सभी पात्र शिक्षकों और शिक्षकेतर कर्मचारियों को निर्धारित समय पर वेतन मिल सके।
इस बयान के बाद वेतन भुगतान को लेकर शिक्षकों और कर्मचारियों के बीच पैदा हुई आशंका दूर करने की कोशिश की गई है। शिक्षा विभाग ने स्पष्ट किया है कि सत्यापन की प्रक्रिया एहतियाती कदम है और इसका उद्देश्य वेतन भुगतान में बाधा डालना नहीं, बल्कि व्यवस्था को पारदर्शी बनाना है।
