पटना : बिहार कैडर के 2011 बैच के आईएएस अधिकारी डॉ. त्यागराजन एसएम को केंद्र सरकार में नई जिम्मेदारी मिली है। उन्हें नई दिल्ली स्थित केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में निदेशक नियुक्त किए जाने की जानकारी सामने आई है। मेडिकल की पढ़ाई से अपने करियर की शुरुआत करने वाले डॉ. त्यागराजन ने पहले भारतीय पुलिस सेवा (IPS) और फिर भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में अपनी पहचान बनाई। बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों में प्रशासनिक जिम्मेदारियां संभालने के बाद उनकी नई नियुक्ति चर्चा में है।
MBBS के बाद चुनी सिविल सेवा की राह
डॉ. त्यागराजन एसएम मूल रूप से तमिलनाडु के कोयंबटूर के रहने वाले हैं। उनका जन्म 20 दिसंबर 1984 को हुआ था। उन्होंने कोयंबटूर मेडिकल कॉलेज से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी की। हालांकि, मेडिकल क्षेत्र में करियर बनाने के बाद उन्होंने सिविल सेवा में जाने का निर्णय लिया और संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा की तैयारी शुरू की।
उनकी करियर यात्रा की खास बात यह है कि उन्होंने एक ही क्षेत्र तक खुद को सीमित नहीं रखा। चिकित्सा शिक्षा के बाद पुलिस सेवा और फिर प्रशासनिक सेवा में प्रवेश कर उन्होंने अपने पेशेवर जीवन को नई दिशा दी।
पहले बने IPS अधिकारी, फिर IAS में हुआ चयन
डॉ. त्यागराजन वर्ष 2010 में भारतीय पुलिस सेवा (IPS) के लिए चयनित हुए। इसके बाद उन्होंने ओडिशा में सहायक पुलिस अधीक्षक (ASP) के रूप में सेवाएं दीं। आगे चलकर उन्होंने दोबारा सिविल सेवा परीक्षा दी और वर्ष 2011 में भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में चयनित हुए। उन्हें बिहार कैडर आवंटित किया गया।
इसके बाद बिहार में उनकी प्रशासनिक पारी शुरू हुई। विभिन्न पदों पर काम करते हुए उन्होंने जिला प्रशासन और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन से जुड़ा अनुभव हासिल किया।
बिहार के कई जिलों में संभाली जिलाधिकारी की जिम्मेदारी
डॉ. त्यागराजन एसएम बिहार में नालंदा, दरभंगा और गया जैसे जिलों में जिलाधिकारी (DM) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। बाद में उन्हें पटना के जिलाधिकारी की जिम्मेदारी भी सौंपी गई।
जिला प्रशासन में उनकी भूमिका विकास योजनाओं के क्रियान्वयन, जनसमस्याओं के समाधान, शहरी व्यवस्था और सरकारी भूमि से जुड़े मामलों जैसे महत्वपूर्ण विषयों से जुड़ी रही। पटना में उनके कार्यकाल के दौरान स्मार्ट सिटी परियोजनाओं, अतिक्रमण हटाने और सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराने से जुड़े प्रशासनिक कार्य भी चर्चा में रहे।
गया में स्वास्थ्य सेवाओं और जल संरक्षण से जुड़े प्रयास
गया के जिलाधिकारी के रूप में कार्य करते हुए डॉ. त्यागराजन से जुड़ी स्वास्थ्य सेवाओं और जनकल्याण की पहलों का भी उल्लेख किया जाता है। इनमें ‘वंडर ऐप’ और ‘श्रवण श्रुति’ जैसी पहलें शामिल हैं, जिनका उद्देश्य जरूरतमंद लोगों तक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बेहतर बनाना रहा है।
उनके प्रशासनिक कार्यकाल में जल संरक्षण से जुड़े प्रयासों को भी महत्व मिला। जिला स्तर पर इस तरह की पहलें स्थानीय जरूरतों के अनुरूप सरकारी योजनाओं को लागू करने और जनभागीदारी को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं।
बिहार बोर्ड के अध्यक्ष पद से केंद्र तक का सफर
केंद्र में नई जिम्मेदारी मिलने से पहले डॉ. त्यागराजन एसएम बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (BSEB) के अध्यक्ष के रूप में कार्यरत थे। उनके पास स्वास्थ्य विभाग में विशेष सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी रहा है।
अब केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय में निदेशक के रूप में उनकी नियुक्ति को उनके प्रशासनिक करियर का महत्वपूर्ण पड़ाव माना जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, यह नियुक्ति केंद्र सरकार की सेंट्रल स्टाफिंग स्कीम के तहत की गई है। बताया गया है कि उनका कार्यकाल पदभार ग्रहण करने की तारीख से पांच वर्ष या अगले आदेश तक, जो पहले हो, निर्धारित है।
क्या है सहकारिता मंत्रालय की भूमिका?
केंद्रीय सहकारिता मंत्रालय देश में सहकारी संस्थाओं और सहकारिता क्षेत्र से जुड़ी नीतियों तथा योजनाओं के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सहकारी समितियों को मजबूत करना, उनके कामकाज में पारदर्शिता बढ़ाना और सहकारिता आधारित आर्थिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करना इस क्षेत्र के प्रमुख उद्देश्य हैं।
ऐसे में बिहार में जिला प्रशासन से लेकर विभिन्न विभागों में काम करने का अनुभव डॉ. त्यागराजन के लिए नई जिम्मेदारी में उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, मंत्रालय में उन्हें सौंपे जाने वाले विशिष्ट कार्यों की जानकारी संबंधित आधिकारिक आदेश और विभागीय सूचना से ही स्पष्ट होगी।
युवाओं के लिए प्रेरक है डॉ. त्यागराजन की यात्रा
डॉ. त्यागराजन एसएम की यात्रा चिकित्सा शिक्षा से शुरू होकर IPS, IAS और अब केंद्र सरकार में नई जिम्मेदारी तक पहुंची है। उनका करियर दिखाता है कि स्पष्ट लक्ष्य, निरंतर प्रयास और नई चुनौतियों को स्वीकार करने की क्षमता से पेशेवर जीवन में अलग-अलग रास्ते बनाए जा सकते हैं।
बिहार के कई महत्वपूर्ण जिलों में सेवाएं देने के बाद अब राष्ट्रीय स्तर पर उनकी नई भूमिका पर नजर रहेगी। सहकारिता मंत्रालय में उनका अनुभव किस तरह योगदान देता है, यह आने वाले समय में देखने वाली बात होगी।







