पटना : बिहार में सरकारी शिक्षकों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का इंतजार एक बार फिर बढ़ गया है। करीब 6 लाख शिक्षकों की सामान्य स्थानांतरण प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद थी, लेकिन MLC चुनाव की घोषणा और आदर्श आचार संहिता के कारण प्रक्रिया अटक गई है। शिक्षकों को उम्मीद थी कि इस बार उन्हें अपने गृह पंचायत या आसपास के स्कूलों में पोस्टिंग मिल सकती है, लेकिन फिलहाल उन्हें और इंतजार करना पड़ सकता है।
शिक्षा विभाग से जुड़ी जानकारी के मुताबिक, चुनावी पाबंदियां 31 अक्टूबर तक लागू हैं। इसके बाद स्थानांतरण प्रक्रिया को आगे बढ़ाने की तैयारी है। यदि जिला और प्रमंडल स्तर पर काम तेजी से पूरा होता है, तो सामान्य तबादले के लिए ई-शिक्षा कोष पोर्टल 7 नवंबर से खोला जा सकता है। हालांकि, यह संभावित तारीख है और आधिकारिक पुष्टि का इंतजार रहेगा।
पहले चरण में जिला स्तर पर सरप्लस शिक्षकों के स्थानांतरण की प्रक्रिया पूरी की जा रही है। शिक्षा विभाग के अनुसार, करीब 26 जिलों में इंट्रा-डिस्ट्रिक्ट सरप्लस ट्रांसफर पूरा हो चुका है। इन जिलों में लगभग 42 हजार शिक्षकों को नए स्कूल आवंटित किए गए हैं। वहीं, 12 जिलों में प्रक्रिया पूरी नहीं होने की बात सामने आई है।
इसके बाद प्रमंडल स्तर पर स्थानांतरण किया जाएगा। इस चरण में शिक्षकों को आवंटित जिलों में स्कूल दिए जाएंगे और अंतिम ट्रांसफर लेटर जारी होगा। फिर राज्य स्तर पर एक प्रमंडल से दूसरे प्रमंडल में जाने के लिए आवेदन करने वाले शिक्षकों के तबादले की प्रक्रिया पूरी की जाएगी। इन चरणों के बाद स्कूलवार रिक्तियां जारी कर सामान्य स्थानांतरण के लिए आवेदन लिए जाने की तैयारी है।
इस बीच म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए आवेदन करने वाले शिक्षक भी इंतजार कर रहे हैं। बिहार शिक्षक स्थानांतरण नियमावली-2026 के तहत ई-शिक्षा कोष पोर्टल पर म्यूचुअल ट्रांसफर के लिए 4,259 आवेदन प्राप्त हुए हैं।
वहीं, विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 71,151 सरप्लस शिक्षकों ने ऐच्छिक स्थानांतरण के लिए आवेदन किया है। राज्य में सरप्लस शिक्षकों की संख्या करीब 1.60 लाख बताई जा रही है।
गौरतलब है कि स्थानांतरण प्रक्रिया को लेकर पहले भी कई बार कार्यक्रम जारी किए गए, लेकिन तय समय पर सभी चरण पूरे नहीं हो सके। जुलाई 2026 में जारी शुरुआती कार्यक्रम के बाद बाढ़ प्रभावित जिलों का हवाला देते हुए अक्टूबर में आवेदन का नया कार्यक्रम तय किया गया था। अब MLC चुनाव के कारण प्रक्रिया में फिर देरी हुई है।
दरअसल, सरप्लस शिक्षक का मतलब यह नहीं है कि स्कूल में शिक्षक की जरूरत नहीं है। इसका अर्थ है कि किसी स्कूल में निर्धारित मानक और विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में जरूरत से अधिक शिक्षक तैनात हैं। शिक्षा विभाग का उद्देश्य ऐसे शिक्षकों को उन स्कूलों में भेजना है, जहां शिक्षकों की कमी है, ताकि पढ़ाई प्रभावित न हो।
अब शिक्षकों की नजर 7 नवंबर पर है। देखना होगा कि ई-शिक्षा कोष पोर्टल निर्धारित समय पर खुलता है या स्थानांतरण के लिए उन्हें फिर इंतजार करना पड़ता है।







