पटना : बिहार के शहरी क्षेत्रों में रहने वाले गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने की दिशा में सरकार की ओर से प्रयास तेज किए जा रहे हैं। प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य में तकनीकी टीमों के गठन और उन्हें आवश्यक संसाधन उपलब्ध कराने की तैयारी की जा रही है। इससे योजना से जुड़ी प्रक्रियाओं को गति देने और पात्र लाभार्थियों तक आवास का लाभ पहुंचाने में मदद मिलने की उम्मीद है।
तकनीकी टीमों की मदद से तेज होगा योजना का काम
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत शहरी गरीब परिवारों को पक्का मकान उपलब्ध कराने के लिए विभिन्न स्तरों पर काम किया जा रहा है। योजना के बेहतर क्रियान्वयन के लिए राज्यस्तरीय और शहरस्तरीय तकनीकी प्रकोष्ठ (टेक्निकल सेल) महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
इन टीमों के माध्यम से आवास परियोजनाओं की तकनीकी प्रक्रिया, योजनाओं की निगरानी और क्रियान्वयन से संबंधित कार्यों में सहायता मिलेगी। इससे शहरी निकायों में योजना को व्यवस्थित तरीके से आगे बढ़ाने में मदद मिल सकती है।
45 शहरी निकायों में आवास योजना के लिए राशि स्वीकृत
बिहार के नगर विकास एवं आवास विभाग ने प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 के तहत 45 परियोजनाओं के क्रियान्वयन के लिए वित्तीय वर्ष 2026-27 में कुल 233.05 करोड़ रुपये की राशि जारी करने की स्वीकृति दी थी। यह राशि केंद्र और राज्य सरकार के हिस्से से संबंधित है। इससे इन परियोजनाओं में आवास निर्माण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी।
विभाग की ओर से तकनीकी प्रकोष्ठों की स्थापना के लिए भी वित्तीय प्रावधान किया गया है। इसका उद्देश्य योजना के संचालन में तकनीकी सहयोग को मजबूत करना है।
पात्र परिवारों को मिलेगा योजना का लाभ
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी 2.0 का उद्देश्य शहरी क्षेत्रों में रहने वाले पात्र परिवारों को आवास की सुविधा उपलब्ध कराना है। योजना के तहत लाभ पाने के लिए निर्धारित पात्रता और संबंधित नियमों का पालन करना आवश्यक है।
हालांकि, तकनीकी टीमों के गठन की प्रक्रिया, उनकी नियुक्ति और कार्य शुरू होने की निश्चित तारीख को लेकर विस्तृत आधिकारिक जानकारी सामने आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। लाभार्थियों को सलाह दी जाती है कि वे आवेदन, पात्रता और योजना से जुड़ी जानकारी के लिए अपने संबंधित नगर निकाय या नगर विकास एवं आवास विभाग की आधिकारिक सूचनाओं पर नजर रखें।







