पटना : बिहार में जमानत के लिए लंबे समय तक इंतजार करने के मामलों को कम करने की दिशा में पटना हाईकोर्ट ने महत्वपूर्ण कदम उठाया है। जमानत याचिकाओं के जल्द निपटारे को लेकर हाईकोर्ट ने स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (SOP) जारी की है। इसका उद्देश्य जमानत से जुड़े मामलों की सुनवाई में होने वाली देरी को कम करना और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देना है।
जमानत याचिकाओं के निपटारे पर विशेष जोर
जमानत याचिकाओं के निपटारे को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने 12 सितंबर 2025 को दिए गए फैसले में हाईकोर्ट और अधीनस्थ अदालतों को निर्देश दिया था कि जमानत और अग्रिम जमानत की याचिकाओं का निपटारा दाखिल होने की तारीख से दो महीने के भीतर, जहां तक संभव हो, किया जाए। हालांकि, यदि देरी याचिकाकर्ता या संबंधित पक्षों के कारण होती है, तो इस समयसीमा में अपवाद हो सकता है।
पटना हाईकोर्ट की ओर से 21 अक्टूबर 2026 को इस फैसले के अनुपालन में जमानत याचिकाओं के शीघ्र निपटारे को लेकर निर्देश जारी किए गए हैं।
क्यों अहम है यह फैसला?
जमानत याचिकाओं पर सुनवाई में अनावश्यक देरी होने से आरोपित व्यक्तियों और उनके परिवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। खासकर जेल में बंद विचाराधीन कैदियों के लिए समय पर सुनवाई बेहद महत्वपूर्ण है। अदालतों में लंबित मामलों का दबाव होने के बावजूद व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों को प्राथमिकता देना न्यायिक प्रक्रिया का अहम हिस्सा है।
नई SOP और संबंधित न्यायिक निर्देशों का उद्देश्य जमानत याचिकाओं की सुनवाई को व्यवस्थित करना, अनावश्यक देरी को रोकना और मामलों के समयबद्ध निपटारे को बढ़ावा देना है।
क्या हर व्यक्ति को दो महीने में मिल जाएगी जमानत?
यह समझना जरूरी है कि दो महीने में याचिका पर फैसला करने का निर्देश, जमानत मिलने की गारंटी नहीं है। अदालत मामले के तथ्यों, आरोपों, उपलब्ध साक्ष्यों और लागू कानून के आधार पर जमानत देने या खारिज करने का निर्णय लेती है। यानी जोर जमानत याचिका पर समय से फैसला करने पर है, न कि हर आरोपी को जमानत देने पर।
बिहार में जमानत याचिकाओं के शीघ्र निपटारे के लिए जारी निर्देशों से न्यायिक प्रक्रिया में तेजी लाने और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मामलों में अनिश्चितता कम करने की उम्मीद है।
