डेस्क : बिहार के चर्चित IPS अधिकारी और खगड़िया के पुलिस अधीक्षक भानु प्रताप सिंह एक बार फिर पारिवारिक विवाद को लेकर चर्चा में हैं। उनकी पत्नी पूजा सिंह ने पति पर उत्पीड़न के आरोप लगाए हैं। मामले को गंभीरता से लेते हुए राज्य महिला आयोग ने समन जारी किया है। इस घटनाक्रम के बाद पुलिस महकमे में भी मामला चर्चा का विषय बना हुआ है।
पत्नी पूजा सिंह ने लगाए गंभीर आरोप
रिपोर्टों के अनुसार, पूजा सिंह ने अपने पति पर मानसिक प्रताड़ना और वैवाहिक जीवन में परेशानी पैदा करने के आरोप लगाए हैं। उनका दावा है कि IPS अधिकारी बनने के बाद उनके पति के व्यवहार में बदलाव आया। पूजा ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें अपनी छह वर्षीय बेटी से मिलने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
पूजा सिंह का कहना है कि वह अपने परिवार को बचाना चाहती हैं और अपनी बेटी के साथ रहना चाहती हैं। उन्होंने इस मामले में अधिकारियों से हस्तक्षेप करने और न्याय दिलाने की मांग की है। हालांकि, उनके आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि होना अभी बाकी है।
राज्य महिला आयोग ने भेजा समन
पत्नी की ओर से लगाए गए आरोपों के बीच राज्य महिला आयोग की ओर से समन भेजे जाने की खबर सामने आई है। आयोग की कार्रवाई का उद्देश्य मामले में संबंधित पक्षों का पक्ष जानना और शिकायत पर आगे की प्रक्रिया तय करना हो सकता है।
हालांकि, समन की तारीख, सुनवाई के निर्धारित समय और आयोग के आधिकारिक आदेश से संबंधित विस्तृत जानकारी की स्वतंत्र पुष्टि आवश्यक है।
मामला पहले भी आ चुका है सुर्खियों में
IPS भानु प्रताप सिंह और उनकी पत्नी के बीच विवाद इससे पहले भी सार्वजनिक चर्चा में आया था। सितंबर 2026 में पूजा सिंह ने पति पर प्रताड़ना और अपनी बेटी से मिलने नहीं देने के आरोप लगाए थे। इस संबंध में उनका एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह खगड़िया स्थित एसपी आवास के बाहर अपनी बेटी से मिलने की गुहार लगाती दिखाई दी थीं।
इसके बाद पूजा सिंह ने बिहार के पुलिस महानिदेशक (DGP) से भी मुलाकात की थी। उन्होंने अपने पति और बेटी के साथ रहने की इच्छा जाहिर करते हुए मामले के समाधान की मांग की थी।
कौन हैं IPS भानु प्रताप सिंह?
भानु प्रताप सिंह बिहार कैडर के 2021 बैच के IPS अधिकारी हैं। वह खगड़िया जिले में पुलिस अधीक्षक के पद पर तैनात हैं। उनके और उनकी पत्नी के बीच चल रहा विवाद अब पारिवारिक मामले से आगे बढ़कर प्रशासनिक स्तर पर भी चर्चा में है।
फिलहाल, मामले में दोनों पक्षों के तथ्यों और आधिकारिक बयानों के आधार पर ही किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित होगा। महिला आयोग की आगे की कार्रवाई और संबंधित पक्षों का रुख इस मामले में महत्वपूर्ण रहेगा।







