डेस्क : बिहार के ऐतिहासिक भागलपुर जिले में उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक नया अध्याय जुड़ने जा रहा है। प्राचीन विक्रमशिला विश्वविद्यालय की ऐतिहासिक धरती पर अब आधुनिक केंद्रीय विश्वविद्यालय बनाने की तैयारी तेज हो गई है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए जमीन अधिग्रहण की सबसे बड़ी बाधा लगभग दूर हो चुकी है। जिला प्रशासन ने 215.355 एकड़ रैयती जमीन का अधिग्रहण पूरा कर उसे शिक्षा विभाग को सौंप दिया है। अब इस पूरी प्रक्रिया की रिपोर्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेजी जाएगी। इसके बाद बजट आवंटन और निर्माण के लिए टेंडर की प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
इस परियोजना को लेकर सबसे बड़ी चर्चा 20 नवंबर को होने वाले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रस्तावित भागलपुर दौरे की है। संभावना जताई जा रही है कि इस दौरान प्रधानमंत्री विक्रमशिला केंद्रीय विश्वविद्यालय की आधारशिला रख सकते हैं। हालांकि, शिलान्यास को लेकर आधिकारिक पुष्टि का इंतजार है।
215 एकड़ से अधिक जमीन का अधिग्रहण पूरा
जिला भू-अर्जन कार्यालय ने अधिग्रहित 215.355 एकड़ रैयती जमीन का दखल-कब्जा शिक्षा विभाग के अधिकृत पदाधिकारी और प्रभारी जिला शिक्षा पदाधिकारी महेश प्रसाद को सौंप दिया है। डीएम अलंकृता पांडे के अनुसार, जमीन के रैयतों को मुआवजे का भुगतान कर अधिग्रहण की प्रक्रिया पूरी कर ली गई है। इसके लिए करीब 84.99 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया है।
219.645 एकड़ में बनेगा विश्वविद्यालय का परिसर
प्रस्तावित केंद्रीय विश्वविद्यालय का निर्माण कुल 219.645 एकड़ जमीन पर किया जाना है। इसमें 215.355 एकड़ रैयती और करीब 4.290 एकड़ सरकारी जमीन शामिल है। सरकारी जमीन के हस्तांतरण की प्रक्रिया भी आगे बढ़ाई जा रही है।
विश्वविद्यालय के लिए कहलगांव अनुमंडल के अंतीचक और मलकपुर मौजा में जमीन अधिग्रहित की गई है। अंतीचक में 96.44 एकड़ और मलकपुर में 95.615 एकड़ रैयती जमीन का अधिग्रहण हुआ है।
प्राचीन विरासत के साथ आधुनिक सुविधाएं
इस विश्वविद्यालय का परिसर सामान्य विश्वविद्यालयों से अलग होगा। इसका डिजाइन दिल्ली की स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (SPA) ने तैयार किया है। प्रस्तावित परिसर में प्राचीन विक्रमशिला की वास्तुकला की झलक के साथ आधुनिक शैक्षणिक सुविधाओं का समावेश किया जाएगा।
यहां अंतरराष्ट्रीय स्तर के रिसर्च सेंटर, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, डिजिटल लाइब्रेरी और आधुनिक प्रशासनिक भवन विकसित करने की योजना है। इससे बिहार के विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा और शोध के नए अवसर मिलने की उम्मीद है।
2015 में प्रधानमंत्री ने की थी घोषणा
विक्रमशिला को अंतरराष्ट्रीय शैक्षणिक केंद्र के रूप में विकसित करने की घोषणा वर्ष 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बिहार पैकेज के दौरान की थी। इसके बाद से ही इस परियोजना को लेकर कवायद चल रही थी। अब जमीन अधिग्रहण का महत्वपूर्ण काम पूरा होने के बाद निर्माण की दिशा में आगे बढ़ने का रास्ता साफ हुआ है।
फिलहाल जिला प्रशासन की रिपोर्ट केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय को भेजने की तैयारी है। इसके बाद बजट और टेंडर से जुड़ी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। अब सबकी नजर 20 नवंबर को प्रधानमंत्री के प्रस्तावित भागलपुर दौरे पर है।
अगर इस दौरान विश्वविद्यालय का शिलान्यास होता है तो यह भागलपुर ही नहीं, बल्कि पूरे बिहार के लिए उच्च शिक्षा के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि होगी। जिस विक्रमशिला की पहचान कभी दुनिया के बड़े शिक्षा केंद्रों में होती थी, उसी ऐतिहासिक धरती पर आधुनिक विश्वविद्यालय के निर्माण से बिहार की शैक्षणिक विरासत को नई पहचान मिलने की उम्मीद है।







