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मोतीपुर की बंद चीनी मिल की जमीन पर फिर दौड़ेगा विकास का पहिया! 266 एकड़ में लगेंगे नए उद्योग, कैबिनेट ने दी मंजूरी

मुजफ्फरपुर : जिले के मोतीपुर में लंबे समय से बंद पड़ी चीनी मिल की जमीन अब औद्योगिक विकास का नया केंद्र बनने जा रही है। वर्षों से खाली पड़ी इस जमीन का इस्तेमाल अब चीनी मिल की स्थापना और दूसरे उद्योगों को विकसित करने के लिए किया जाएगा। इस दिशा में सम्राट चौधरी सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। राज्य मंत्रिपरिषद ने बिहार राज्य चीनी निगम की मोतीपुर इकाई की कुल 266 एकड़ जमीन के औद्योगिक उपयोग को मंजूरी दे दी है। इस फैसले से मुजफ्फरपुर और आसपास के इलाकों में निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

दरअसल, मोतीपुर में बिहार राज्य चीनी निगम की एक पुरानी चीनी मिल लंबे समय से बंद पड़ी है। इसकी जमीन का उपयोग औद्योगिक गतिविधियों के लिए करने की योजना बनाई गई है। राज्य मंत्रिपरिषद की स्वीकृति के अनुसार, कुल 266.66 एकड़ जमीन में से 115.08 एकड़ जमीन चीनी मिल की स्थापना के लिए निर्धारित की गई है। वहीं, शेष 151.58 एकड़ जमीन को दूसरे उद्योगों की स्थापना के लिए उद्योग विभाग को हस्तांतरित करने की मंजूरी दी गई है।

115 एकड़ में चीनी मिल, 151 एकड़ में दूसरे उद्योग

सरकार की इस योजना के तहत मोतीपुर में एक बार फिर चीनी उद्योग को बढ़ावा देने की तैयारी है। इसके लिए 115.08 एकड़ जमीन का उपयोग चीनी मिल की स्थापना के लिए किया जाएगा। वहीं, 151.58 एकड़ जमीन पर अलग-अलग औद्योगिक इकाइयां स्थापित करने का रास्ता तैयार होगा।

इससे न केवल चीनी उद्योग को प्रोत्साहन मिलेगा, बल्कि दूसरे क्षेत्रों के निवेशकों को भी जमीन उपलब्ध हो सकेगी। उद्योगों की स्थापना से स्थानीय स्तर पर आर्थिक गतिविधियां बढ़ने और रोजगार के नए अवसर पैदा होने की संभावना है।

समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार के लक्ष्य पर जोर

यह फैसला मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सरकार के सात निश्चय-3 कार्यक्रम के तहत ‘समृद्ध उद्योग-सशक्त बिहार’ के लक्ष्य से जुड़ा है। सरकार का उद्देश्य राज्य में औद्योगिक निवेश को बढ़ावा देना और अलग-अलग जिलों में उद्योगों के लिए जरूरी आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है।

कृषि आधारित उद्योगों को भी मिलेगा मौका

मोतीपुर और इसके आसपास का इलाका कृषि प्रधान है। ऐसे में यहां कृषि एवं खाद्य प्रसंस्करण उद्योग, वेयरहाउसिंग, लॉजिस्टिक्स और दूसरे कृषि आधारित उद्योगों के विकास की संभावनाएं हैं। जमीन उपलब्ध होने से इन क्षेत्रों में निवेश की राह आसान हो सकती है।

कुल मिलाकर, मोतीपुर की बंद चीनी मिल की जमीन का औद्योगिक उपयोग मुजफ्फरपुर के विकास के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। अब देखना होगा कि जमीन हस्तांतरण के बाद चीनी मिल और दूसरी औद्योगिक इकाइयों की स्थापना की प्रक्रिया कितनी तेजी से आगे बढ़ती है।

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