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बिहार में BJP का बड़ा दांव, दोनों निर्दलीय MLC को पार्टी में कराया शामिल

डेस्क : बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव के बाद एक बार फिर सियासी हलचल तेज हो गई है। चुनाव में निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत दर्ज करने वाले दोनों नवनिर्वाचित विधान पार्षदों को भारतीय जनता पार्टी (BJP) में शामिल कराने की खबर सामने आई है। इस घटनाक्रम को बिहार की राजनीति में नए समीकरणों के तौर पर देखा जा रहा है।

हालांकि, इस घटनाक्रम में एक अहम बात यह है कि दोनों विधान पार्षदों ने भाजपा को समर्थन देने का ऐलान किया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद यह राजनीतिक घटनाक्रम सामने आया है।

राहुल राज और बंशीधर ब्रजवासी ने दिया भाजपा को समर्थन

बिहार विधान परिषद की सारण शिक्षक निर्वाचन क्षेत्र से राहुल राज और तिरहुत स्नातक निर्वाचन क्षेत्र से बंशीधर ब्रजवासी ने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में जीत हासिल की थी। दोनों की जीत ने चुनाव परिणामों में अलग पहचान बनाई थी।

राहुल राज ने सारण शिक्षक सीट पर जन सुराज के उम्मीदवार आफाक अहमद को पराजित किया, जबकि बंशीधर ब्रजवासी ने तिरहुत स्नातक सीट पर जदयू के अभिषेक झा को हराकर लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की।

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात के बाद बदला सियासी समीकरण

चुनाव परिणाम आने के बाद दोनों निर्दलीय विधान पार्षदों ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद दोनों ने भाजपा को समर्थन देने का फैसला किया। इससे बिहार विधान परिषद में भाजपा की संख्या और राजनीतिक स्थिति को मजबूती मिली है।

गौरतलब है कि बिहार विधान परिषद में कुल 75 सीटें हैं। भाजपा के पास पहले 24 सदस्य थे। एक सीट पर हार के बाद यह संख्या 23 रह गई थी। अब दोनों निर्दलीय एमएलसी का समर्थन मिलने से भाजपा के साथ सदस्यों की संख्या 26 हो गई है।

विधान परिषद में किस दल की कितनी ताकत?

बिहार विधान परिषद के हालिया चुनाव परिणामों के बाद अलग-अलग दलों की स्थिति भी चर्चा में है। भाजपा के बाद जदयू और राजद की परिषद में महत्वपूर्ण मौजूदगी है। जदयू के पास 20 और राजद के पास 17 सदस्य हैं। वहीं, दो निर्दलीय सदस्यों का भाजपा को समर्थन मिलने से सदन में राजनीतिक समीकरण पर इसका असर देखने को मिल सकता है।

बिहार की राजनीति में आगे क्या होगा?

दोनों निर्दलीय एमएलसी का भाजपा को समर्थन देना आगामी राजनीतिक गतिविधियों के लिहाज से महत्वपूर्ण घटनाक्रम है। खासकर विधान परिषद में विधायी कार्यों और विभिन्न मुद्दों पर होने वाली चर्चा के दौरान इसका प्रभाव दिखाई दे सकता है।

अब देखना होगा कि भाजपा इस समर्थन को संगठनात्मक और राजनीतिक स्तर पर किस तरह आगे बढ़ाती है तथा आने वाले समय में बिहार की राजनीति में इसके क्या परिणाम सामने आते हैं।

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