पटना: बिहार की राजनीति में विधान परिषद चुनाव के बाद दलों के बीच सियासी बयानबाजी तेज हो गई है। विधान परिषद की निर्दलीय सीटों से जीत हासिल करने वाले बंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज के भाजपा में शामिल होने की चर्चा पर जनता दल यूनाइटेड (JDU) ने कड़ी प्रतिक्रिया दी है। पूर्व मंत्री और जदयू के वरिष्ठ विधायक श्याम रजक ने इस मामले को नियम-कानून के खिलाफ बताते हुए इसे पूरी तरह अनैतिक करार दिया है। उन्होंने कहा कि निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव जीतने के बाद किसी राजनीतिक दल में शामिल होना गलत है।
निर्दलीय जीतकर किसी पार्टी में शामिल होना गलत: श्याम रजक
श्याम रजक ने कहा कि अगर दोनों निर्दलीय विधान पार्षद भाजपा में शामिल हुए हैं तो यह पूरी तरह गलत है। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी निर्दलीय सदस्य को किसी राजनीतिक दल को समर्थन देने का अधिकार है। यदि उन्होंने भाजपा को समर्थन दिया है तो इसमें कोई आपत्ति नहीं है और यह नियमों के अनुरूप है।
हालांकि, उन्होंने समर्थन देने और किसी पार्टी में शामिल होने के बीच अंतर बताते हुए कहा कि निर्दलीय जीत हासिल करने के बाद किसी राजनीतिक दल की सदस्यता लेना अनैतिक है। अगर दोनों सदस्य भाजपा में शामिल हुए हैं तो यह उचित नहीं है। श्याम रजक के इस बयान से बिहार की सियासत में नई बहस छिड़ने के आसार हैं।
125 यूनिट मुफ्त बिजली पर मुख्यमंत्री की अपील का समर्थन
मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी की ओर से संपन्न लोगों से 125 यूनिट मुफ्त बिजली का लाभ स्वेच्छा से छोड़ने की अपील पर भी श्याम रजक ने अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने मुख्यमंत्री की अपील का समर्थन करते हुए कहा कि इस पहल की सोच अच्छी है, लेकिन सरकार को पहले यह स्पष्ट करना होगा कि कौन संपन्न है और कौन गरीब।
उन्होंने कहा कि इसके लिए सरकार को एक व्यवस्थित सूची तैयार करनी चाहिए। जब तक यह तय नहीं होगा कि किन परिवारों को मुफ्त बिजली की जरूरत है और कौन आर्थिक रूप से सक्षम है, तब तक इस योजना को सही तरीके से लागू करना मुश्किल होगा।
गरीबों को जमीन देने की योजना पर भी उठाए सवाल
बिहार सरकार की ओर से गरीब परिवारों को पांच डिसमिल जमीन देने की योजना पर भी श्याम रजक ने सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार की मंशा अच्छी हो सकती है, लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि सरकार के पास गरीबों की सही जानकारी और पहचान करने की व्यवस्था कितनी मजबूत है।
उन्होंने कहा कि जब सरकार को यह स्पष्ट रूप से पता ही नहीं है कि कौन गरीब है और किसे जमीन की जरूरत है, तो लाभार्थियों तक योजना का फायदा कैसे पहुंचेगा।
श्याम रजक ने सरकार की सोच को अच्छा बताते हुए उसके सिस्टम पर सवाल उठाया। उनका कहना है कि योजनाओं की घोषणा करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि उनके प्रभावी क्रियान्वयन के लिए मजबूत व्यवस्था और सही लाभार्थियों की पहचान जरूरी है।
