पटना/बक्सर : बिहार सरकार ने गुजरात के पूर्व राज्यपाल और भाजपा के वरिष्ठ नेता रहे स्वर्गीय कैलाशपति मिश्र की स्मृति को संजोने के लिए बक्सर में पुस्तकालय बनाने का निर्णय लिया है। इस पुस्तकालय का निर्माण उनके नाम पर किया जाएगा। इसमें पारंपरिक पुस्तकालय के साथ-साथ डिजिटल लाइब्रेरी की सुविधा भी उपलब्ध कराई जाएगी। इससे जिले के विद्यार्थियों, शोधार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं को काफी लाभ मिलने की उम्मीद है।
इस संबंध में शिक्षा विभाग ने पहल शुरू कर दी है। शिक्षा विभाग के सचिव राजीव रौशन ने बक्सर के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर पुस्तकालय निर्माण के लिए उपयुक्त जमीन चिह्नित करने का निर्देश दिया है। इसके लिए बक्सर के सिविल लाइंस स्थित एसपी विद्या मंदिर स्कूल परिसर में जमीन की उपलब्धता की जानकारी मांगी गई है। जिलाधिकारी से जमीन का रकबा, स्वामित्व, चौहद्दी और वर्तमान स्थिति से संबंधित रिपोर्ट के साथ अनापत्ति प्रमाणपत्र भी उपलब्ध कराने को कहा गया है।
डिजिटल और फिजिकल दोनों तरह की होगी सुविधा
शिक्षा मंत्री मिथिलेश तिवारी के अनुसार, प्रस्तावित कैलाशपति मिश्र स्मृति पुस्तकालय में फिजिकल और डिजिटल दोनों प्रकार की सुविधाएं विकसित की जाएंगी। पुस्तकालय में कैलाशपति मिश्र के जीवन, व्यक्तित्व और योगदान से जुड़ी पुस्तकें उपलब्ध रहेंगी। इसके अलावा देश की अन्य महान विभूतियों की जीवनियां और कैलाशपति मिश्र की कविताओं का संग्रह भी रखा जाएगा।
इस पुस्तकालय का उद्देश्य केवल पुस्तकों को उपलब्ध कराना नहीं, बल्कि युवाओं को अध्ययन, शोध और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर शैक्षणिक वातावरण प्रदान करना है।
कैलाशपति मिश्र की स्मृति में जयंती पर राजकीय समारोह
कैलाशपति मिश्र की पुण्यतिथि के अवसर पर 3 नवंबर 2026 को बक्सर के बड़का ढाकाइच गांव में आयोजित श्रद्धांजलि कार्यक्रम में भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष संजय सरावगी ने उनकी जयंती को राजकीय समारोह के रूप में मनाने की घोषणा की। उन्होंने बताया कि इस प्रस्ताव को बिहार मंत्रिमंडल की स्वीकृति मिल चुकी है और अक्टूबर 2027 से उनकी जयंती राजकीय समारोह के रूप में मनाई जाएगी।
कार्यक्रम में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय, बिहार के कृषि मंत्री विजय कुमार सिन्हा सहित एनडीए के कई वरिष्ठ नेता और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
कौन थे कैलाशपति मिश्र?
कैलाशपति मिश्र का जन्म 5 अक्टूबर 1923 को बिहार के बक्सर जिले में हुआ था। वे भारतीय जनसंघ और भारतीय जनता पार्टी के संस्थापक सदस्यों में शामिल थे। बिहार में भाजपा संगठन को मजबूत बनाने में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका रही। वे 1977 से 1980 तक बिहार सरकार में वित्त मंत्री रहे और वर्ष 1980 में बिहार भाजपा के पहले प्रदेश अध्यक्ष बने।
इसके अलावा वे राज्यसभा के सदस्य भी रहे। बाद में उन्हें गुजरात का राज्यपाल नियुक्त किया गया। उन्होंने राजस्थान के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार भी संभाला था। 3 नवंबर 2012 को उनका निधन हो गया था।
बक्सर में उनके नाम पर पुस्तकालय का निर्माण उनकी स्मृतियों को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने के साथ-साथ जिले के विद्यार्थियों के लिए एक महत्वपूर्ण शैक्षणिक केंद्र साबित हो सकता है।







