मुजफ्फरपुर : बिहार में पर्यावरण संरक्षण, जल संचयन और हरित क्षेत्र के विस्तार को लेकर चलाए जा रहे जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत मुजफ्फरपुर जिले में उल्लेखनीय उपलब्धियां दर्ज की गई हैं। जिले में अब तक 23.19 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं, जबकि 1500 सार्वजनिक तालाबों, पोखरों, आहर और पईन का जीर्णोद्धार पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही जल संरक्षण, सौर ऊर्जा और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए भी कई महत्वपूर्ण कार्य किए गए हैं।
1500 तालाबों और पोखरों का जीर्णोद्धार पूरा
मंगलवार, 3 नवंबर को समाहरणालय स्थित सभाकक्ष में जल-जीवन-हरियाली दिवस का आयोजन किया गया। जिला प्रशासन की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम में ‘जल-जीवन-हरियाली : जन-जागरूकता से सतत विकास की ओर सामूहिक पहल’ विषय पर परिचर्चा हुई।
जिलाधिकारी कुमार गौरव ने जिलेवासियों के नाम अपने संदेश में कहा कि जलवायु परिवर्तन, ग्लोबल वार्मिंग और पर्यावरणीय असंतुलन जैसी चुनौतियों से निपटने के लिए जल संरक्षण और हरित क्षेत्र का विस्तार बेहद जरूरी है। उन्होंने अभियान को जनभागीदारी के माध्यम से जनआंदोलन बनाने पर जोर दिया।
जिलाधिकारी ने बताया कि अभियान के 11 प्रमुख अवयवों पर 15 क्रियान्वयन विभागों के समन्वय से काम किया जा रहा है। इसमें जल संरचनाओं का जीर्णोद्धार, पौधारोपण, वर्षा जल संचयन, जैविक खेती और सौर ऊर्जा को प्रोत्साहन देना शामिल है।
जल संरक्षण के क्षेत्र में जिले की बड़ी उपलब्धियां
जिला प्रशासन की ओर से जारी प्रगति रिपोर्ट के अनुसार मुजफ्फरपुर में जल संरक्षण के लिए कई महत्वपूर्ण काम पूरे किए गए हैं।
– 1500 तालाब-पोखरों का जीर्णोद्धार: सार्वजनिक तालाब, पोखर, आहर और पईन के जीर्णोद्धार के सभी 1500 कार्य पूरे हो चुके हैं।
– 391 कुएं अतिक्रमणमुक्त: जिले में चिह्नित सभी 391 सार्वजनिक कुओं को अतिक्रमण से मुक्त कराया गया है।
– 221 जल संरचनाएं अतिक्रमणमुक्त: सभी चिह्नित 221 सार्वजनिक जल संचयन संरचनाओं को अतिक्रमणमुक्त कराया गया है।
– 1046 कुओं का जीर्णोद्धार: सार्वजनिक कुओं के जीर्णोद्धार के 1048 कार्यों में से 1046 पूरे हो चुके हैं।
– 13,554 सोख्ता निर्माण: सार्वजनिक चापाकलों के किनारे शुरू किए गए 13,558 सोख्ता निर्माण कार्यों में से 13,554 पूरे हो चुके हैं।
– 988 सोख्ता निर्माण: सार्वजनिक कुओं के किनारे सोख्ता निर्माण के सभी 988 कार्य पूरे कर लिए गए हैं।
इसके अलावा चेक डैम और जल संचयन की अन्य संरचनाओं के निर्माण के लिए शुरू किए गए 43 कार्यों में से 30 पूरे हो चुके हैं।
23.19 लाख पौधारोपण, 456 भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र
जल-जीवन-हरियाली अभियान के तहत जिले में हरित क्षेत्र बढ़ाने के लिए बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया गया है। अब तक 23.19 लाख से अधिक पौधे लगाए जा चुके हैं।
वहीं, सरकारी भवनों में छत पर वर्षा जल संचयन की व्यवस्था विकसित करने के लिए 948 भवनों में काम शुरू किया गया था, जिनमें से 940 भवनों में कार्य पूरा हो चुका है।
ऊर्जा संरक्षण को बढ़ावा देने के लिए जिले के 456 भवनों में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित किए गए हैं। इससे पारंपरिक ऊर्जा स्रोतों पर निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा को प्रोत्साहित करने में मदद मिलेगी।
जैविक खेती और टपकन सिंचाई को भी बढ़ावा
अभियान का उद्देश्य केवल जल संरक्षण और पौधारोपण तक सीमित नहीं है, बल्कि कृषि क्षेत्र में भी टिकाऊ तरीकों को बढ़ावा देना है।
प्रशासन की रिपोर्ट के अनुसार जिले में 9,614.87 एकड़ भूमि को जैविक कृषि के दायरे में लाया गया है। वहीं, 2,525.42 एकड़ भूमि में टपकन सिंचाई को बढ़ावा दिया गया है।
नए जल स्रोतों के निर्माण के तहत 6,090 कार्य शुरू किए गए थे, जिनमें से 6,075 पूरे हो चुके हैं।
आजीविका और महिला सशक्तिकरण से भी जुड़ा अभियान
जिलाधिकारी कुमार गौरव ने कहा कि जल-जीवन-हरियाली अभियान पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण का भी माध्यम बन रहा है।
जीविका के माध्यम से तालाबों में मत्स्य पालन और बत्तख पालन जैसी गतिविधियों को प्रोत्साहित किया जा रहा है। इससे ग्रामीण परिवारों की आमदनी बढ़ाने और महिलाओं को आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है।
उन्होंने संबंधित विभागों को गांव-गांव में नियमित जागरूकता और उन्मुखीकरण कार्यशालाएं आयोजित करने का निर्देश दिया। साथ ही आम लोगों, सामाजिक संगठनों और विभिन्न विभागों से अभियान में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की।
जिलाधिकारी ने कहा कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ, सुरक्षित और संतुलित पर्यावरण सुनिश्चित करना हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। जल संरक्षण और हरियाली को लेकर जनभागीदारी ही इस अभियान की वास्तविक सफलता का आधार बनेगी।
