पेरिस, 18 अगस्त : पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (पीओके) में बढ़ती अशांति के बीच अंतरराष्ट्रीय प्रेस स्वतंत्रता संगठन रिपोर्टर्स विदाउट बॉर्डर्स (आरएसएफ) ने पत्रकारों के खिलाफ कार्रवाई पर गंभीर चिंता जताई है। संगठन ने पाकिस्तानी अधिकारियों से हिरासत में लिए गए पत्रकारों को तत्काल रिहा करने और मीडिया पर व्यापक प्रतिबंध समाप्त करने की मांग की है।
आरएसएफ के मुताबिक, पीओके में इंटरनेट बंदी, अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थान अल जजीरा की वेबसाइट को ब्लॉक करना, पत्रकारों की गिरफ्तारियां, विदेशी पत्रकारों की आवाजाही पर प्रतिबंध और अदालतों से समन जैसी घटनाएं तेजी से बढ़ रही हैं। संगठन ने कहा कि इससे क्षेत्र में प्रेस की स्वतंत्रता पर गंभीर खतरा पैदा हो गया है।
आरएसएफ के अनुसार, पीओके में चुनावी सुधारों की मांग को लेकर हुए प्रदर्शनों को पाकिस्तानी अधिकारियों ने बलपूर्वक दबाया और बड़ी संख्या में लोगों को गिरफ्तार किया। इसी दौरान क्षेत्र की मीडिया कवरेज पर भी नए प्रतिबंध लगाए गए। पीओके में तथाकथित विधानसभा चुनाव 27 जुलाई को हुए थे।
आरएसएफ के दक्षिण एशिया डेस्क की प्रमुख सेलिया मर्सिए ने कहा कि अधिकारियों ने क्षेत्र में प्रभावी रूप से सूचना का अंधकार पैदा करने के लिए हर संभव कदम उठाया है। उन्होंने इंटरनेट बंदी, पत्रकारों की गिरफ्तारियों और उनकी आवाजाही पर प्रतिबंधों को प्रेस स्वतंत्रता में गंभीर गिरावट का संकेत बताया।
संगठन ने पीओके में हिरासत में लिए गए पत्रकारों की तत्काल रिहाई, इंटरनेट सेवाओं की पूर्ण बहाली, विदेशी मीडिया के लिए लगाए गए नए प्रतिबंध हटाने और पत्रकारों के खिलाफ कथित दुरुपयोगपूर्ण कानूनी कार्रवाई रोकने की मांग की है।
आरएसएफ ने बताया कि पाकिस्तान के सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने 02 अगस्त को अल जजीरा की वेबसाइट को ब्लॉक कर दिया था। इसके दो दिन बाद मंत्रालय ने ‘फॉरेन मीडिया फैसिलिटेशन गाइडलाइंस 2026’ जारी कीं। इनके तहत इस्लामाबाद, लाहौर और कराची के बाहर रिपोर्टिंग करने वाले विदेशी संवाददाताओं तथा अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों के लिए काम करने वाले पाकिस्तानी पत्रकारों को अनापत्ति प्रमाणपत्र (एनओसी) लेना अनिवार्य किया गया है।
संगठन ने आरोप लगाया कि इन दिशानिर्देशों के तहत पाकिस्तान की विचारधारा, संप्रभुता, सुरक्षा या सार्वजनिक व्यवस्था के खिलाफ कथित गतिविधियों जैसे अस्पष्ट आधारों पर पत्रकारों की मान्यता रद्द की जा सकती है।
आरएसएफ ने पाकिस्तान में पीईसीए (पेका) कानून के इस्तेमाल पर भी चिंता जताई। संगठन के अनुसार, 29 जुलाई को नेशनल साइबर क्राइम इन्वेस्टिगेशन एजेंसी ने स्वतंत्र पत्रकार असद अली तूर को कथित “झूठी सूचना” प्रसारित करने के मामले में पेका की धारा 26ए के तहत समन भेजा था।
