पटना : प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत घर बनाने का इंतजार कर रहे बिहार के भूमिहीन परिवारों के लिए बड़ी खबर है। राज्य सरकार ने पात्र भूमिहीन लाभुकों को जल्द से जल्द जमीन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया तेज करने का निर्देश दिया है। अधिकारियों को 15 से 30 दिनों के भीतर करीब 11 हजार भूमिहीन लाभुकों को आवास निर्माण के लिए भूखंड उपलब्ध कराने को कहा गया है।
सरकारी जमीन नहीं मिली तो ₹1 लाख की सहायता
अगर किसी पात्र लाभुक को सरकारी जमीन उपलब्ध नहीं हो पाती है, तो उसे जमीन खरीदने के लिए ₹1 लाख की आर्थिक सहायता दी जाएगी। सरकार का उद्देश्य है कि जमीन के अभाव में किसी पात्र परिवार का प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत घर निर्माण का लाभ न रुके।
ग्रामीण विकास विभाग को इस संबंध में चरणबद्ध कार्ययोजना तैयार कर निर्धारित समय सीमा में प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है।
बिहार में 49 लाख से अधिक आवासों का लक्ष्य
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार के अनुसार, वर्ष 2016 से अब तक बिहार को प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत करीब 49 लाख 16 हजार आवासों का लक्ष्य मिला है। इनमें लगभग 43 लाख आवासों का निर्माण पूरा हो चुका है, जबकि करीब 6 लाख आवासों को पूरा कराने की प्रक्रिया जारी है।
सर्वे में एक करोड़ से ज्यादा नाम, पात्रता की होगी जांच
आवास योजना के सर्वेक्षण में बिहार में 1 करोड़ 4 लाख 90 हजार से अधिक नाम सामने आए हैं। वहीं, इनमें वास्तविक पात्र लाभुकों की संख्या करीब 62 से 63 लाख बताई जा रही है।
नाम और पात्र लाभुकों की संख्या में अंतर को देखते हुए अधिकारियों को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए गए हैं।
2026-27 में 11.18 लाख नए घरों का लक्ष्य
बिहार को वित्तीय वर्ष 2026-27 में 11 लाख 18 हजार 937 नए ग्रामीण आवास बनाने का लक्ष्य मिला है। सरकार का जोर पात्र परिवारों को समय पर आवास उपलब्ध कराने के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर भी है।
भूमिहीन लाभुकों के लिए जमीन की समस्या होगी दूर
प्रधानमंत्री आवास योजना में पात्र परिवार के पास घर बनाने के लिए जमीन नहीं होने की स्थिति लंबे समय से एक बड़ी चुनौती रही है। नई पहल के तहत पहले सरकारी जमीन उपलब्ध कराने और ऐसा संभव नहीं होने पर ₹1 लाख की सहायता से जमीन खरीदने का प्रावधान लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
