पटना : बिहार में लगातार बढ़ती बिजली की मांग के बीच राज्य सरकार ने सौर और नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में बड़ा रोडमैप तैयार किया है। सरकार का लक्ष्य वर्ष 2030 तक करीब 24 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करना है। हालांकि, फिलहाल राज्य में करीब 1.92 GW सौर ऊर्जा क्षमता ही कमीशन हो सकी है। ऐसे में आने वाले वर्षों में बड़े पैमाने पर नई ऊर्जा परियोजनाओं को जमीन पर उतारना बड़ी चुनौती होगी।
बिहार में नवीकरणीय ऊर्जा के विस्तार के लिए करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना पर काम किया जा रहा है। इसमें बड़े सोलर प्रोजेक्ट, रूफटॉप सोलर, ऊर्जा भंडारण, ट्रांसमिशन नेटवर्क और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर समेत कई योजनाएं शामिल हैं।
23.968 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता का लक्ष्य
बिहार आर्थिक सर्वेक्षण 2025-26 के मुताबिक राज्य में करीब 1,922 MW यानी 1.92 GW सौर ऊर्जा क्षमता कमीशन हो चुकी है। वहीं, वर्ष 2029-30 तक करीब 23.968 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित करने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
यह स्पष्ट करना जरूरी है कि 23.968 GW का लक्ष्य केवल सौर ऊर्जा के लिए नहीं है। इसमें सौर ऊर्जा के अलावा अन्य नवीकरणीय ऊर्जा स्रोत भी शामिल हैं। मौजूदा सौर क्षमता की तुलना में कुल नवीकरणीय ऊर्जा लक्ष्य काफी बड़ा है, इसलिए नई परियोजनाओं और निवेश के जरिए ऊर्जा क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है।
बढ़ती बिजली खपत ने बढ़ाई चुनौती
बिहार में बिजली की मांग पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ी है। करीब दो दशक पहले राज्य में बिजली उपभोक्ताओं की संख्या लगभग 17 लाख थी, जो अब बढ़कर 2.2 करोड़ से अधिक हो गई है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में बिजली कनेक्शन बढ़ने के साथ घरेलू, कृषि, कारोबारी और औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली की खपत भी बढ़ी है।
प्रति व्यक्ति बिजली खपत में भी उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2011-12 में बिहार में प्रति व्यक्ति बिजली खपत करीब 134 यूनिट थी, जो 2024-25 में बढ़कर करीब 374 यूनिट हो गई। इससे राज्य में बिजली की बढ़ती जरूरत का अंदाजा लगाया जा सकता है।
2030 तक पीक डिमांड 11,747 MW होने का अनुमान
फिलहाल बिहार में औसत दैनिक बिजली मांग करीब 7,300 से 7,400 MW के आसपास रहती है। गर्मी के मौसम में पीक डिमांड करीब 9,500 MW तक पहुंच जाती है। आने वाले वर्षों में बिजली की मांग और बढ़ने का अनुमान है। वर्ष 2030 तक राज्य की पीक बिजली मांग करीब 11,747 MW तक पहुंचने का अनुमान लगाया गया है।
इसी को देखते हुए उत्पादन क्षमता बढ़ाने के साथ वैकल्पिक और नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को मजबूत करने की योजना बनाई गई है। बिहार रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत अगले पांच वर्षों में बिजली क्षेत्र में करीब 1.38 लाख करोड़ रुपये के निवेश की योजना तैयार की गई है।
उत्पादन से लेकर ट्रांसमिशन तक होगा निवेश
इस निवेश का इस्तेमाल केवल सौर ऊर्जा परियोजनाओं में नहीं किया जाएगा। इसमें नई बिजली उत्पादन परियोजनाएं, सोलर प्रोजेक्ट, पंप्ड स्टोरेज, बैटरी एनर्जी स्टोरेज, ट्रांसमिशन नेटवर्क, ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर, वितरण व्यवस्था, डिजिटल सिस्टम और रखरखाव से जुड़ी योजनाएं भी शामिल हैं।
योजना के तहत करीब 82,679 करोड़ रुपये बिजली उत्पादन से जुड़ी परियोजनाओं पर खर्च किए जाने हैं। वहीं, ट्रांसमिशन व्यवस्था को मजबूत करने के लिए करीब 24,683 करोड़ रुपये का प्रावधान है। इसके तहत करीब 680 सर्किट किलोमीटर ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर विकसित करने की योजना है। इसका उद्देश्य नई नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं से पैदा होने वाली बिजली को ग्रिड तक पहुंचाने की क्षमता को मजबूत करना है।
रूफटॉप सोलर पर भी सरकार का जोर
बिहार में घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। सहकारिता मंत्री राम कृपाल यादव के अनुसार प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को राज्य में व्यापक स्तर पर लागू करने पर जोर दिया जा रहा है।
तीन किलोवाट तक के रूफटॉप सोलर सिस्टम पर केंद्र और राज्य सरकार की ओर से सहायता का प्रावधान बताया गया है। करीब दो लाख रुपये की लागत वाले सिस्टम पर लगभग एक लाख रुपये तक की सरकारी सहायता मिलने की बात कही गई है। इसमें केंद्र की ओर से करीब 70 हजार रुपये और राज्य की ओर से करीब 28 हजार रुपये की सहायता शामिल बताई गई है। शेष राशि के लिए बैंक लोन की सुविधा उपलब्ध होने की जानकारी दी गई है।
राम कृपाल यादव के मुताबिक तीन किलोवाट का रूफटॉप सोलर सिस्टम सामान्य परिस्थितियों में महीने में करीब 400 से 450 यूनिट बिजली पैदा कर सकता है। घर की जरूरत पूरी होने के बाद अतिरिक्त बिजली ग्रिड में भेजी जा सकती है और नेट मीटरिंग के जरिए उसका हिसाब किया जाता है।
छह जिलों में रूफटॉप सोलर पर काम
निजी क्षेत्र की कंपनियां भी बिहार में रूफटॉप सोलर के विस्तार की दिशा में काम कर रही हैं। एल्विन एनर्जी के बिहार प्रबंधक मनीष कुमार के मुताबिक कंपनी फिलहाल छह जिलों में प्रधानमंत्री सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर परियोजनाओं पर काम कर रही है।
कंपनी अगले तीन वर्षों में बिहार के अलग-अलग जिलों में करीब 3,000 करोड़ रुपये निवेश करने की दिशा में आगे बढ़ रही है। कंपनी का लक्ष्य करीब 20 हजार लोगों को सौर ऊर्जा से जुड़े रोजगार से जोड़ना बताया गया है। फिलहाल कंपनी का मुख्य फोकस बड़े सोलर प्लांट के बजाय घरों की छतों पर सोलर सिस्टम लगाने, पैनल उपलब्ध कराने और उन्हें बिजली ग्रिड से जोड़ने पर है।
कजरा में 301 MW का सोलर प्लांट
बिहार में बड़े सौर ऊर्जा प्रोजेक्टों पर भी काम चल रहा है। लखीसराय के कजरा में करीब 2,866 करोड़ रुपये की लागत से 301 MW क्षमता का सोलर पावर प्लांट विकसित किया जा रहा है। इस परियोजना के साथ 523 MWh क्षमता का बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम यानी BESS भी जोड़ा गया है।
ऊर्जा भंडारण की मदद से दिन में पैदा होने वाली सौर बिजली को स्टोर कर जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकेगा। इसके अलावा औरंगाबाद में 150 MW क्षमता के सोलर पार्क के लिए भी शुरुआती कार्य शुरू किया गया है।
सरकारी भवनों पर भी लगेगा रूफटॉप सोलर
राज्य सरकार सरकारी भवनों को भी सौर ऊर्जा से जोड़ने पर जोर दे रही है। बिहार में करीब 12,000 से 12,800 सरकारी भवनों पर रूफटॉप सोलर लगाने की दिशा में काम हुआ है। इससे करीब 115 MW सौर क्षमता विकसित की गई है। इसके अलावा करीब 500 MW अतिरिक्त क्षमता को मंजूरी मिलने की जानकारी दी गई है।
बिहार रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत नए सरकारी भवनों में रूफटॉप सोलर लगाने की व्यवस्था पर भी जोर दिया जा रहा है। इसका उद्देश्य सरकारी कार्यालयों की बिजली जरूरत का एक हिस्सा उनकी अपनी छतों से पूरा करना है।
कृषि फीडरों को भी सोलर से जोड़ने की तैयारी
कृषि क्षेत्र में भी सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ाने की योजना है। प्रधानमंत्री किसान ऊर्जा सुरक्षा एवं उत्थान महाभियान यानी PM-KUSUM के तहत कृषि फीडरों के सोलराइजेशन की दिशा में काम किया जा रहा है।
बिहार में करीब 457 MW क्षमता के फीडरों को सौर ऊर्जा से जोड़ने की योजना है। इसका उद्देश्य कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए बिजली की उपलब्धता बढ़ाने और दिन के समय सौर ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा देना है।
10 लाख घरों को सूर्य घर योजना से जोड़ने का लक्ष्य
बिहार में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत करीब 10 लाख उपभोक्ताओं को जोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। दक्षिण बिहार पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी लिमिटेड के अर्बन प्रोजेक्ट-1 के मुख्य अभियंता श्री राम शर्मा के मुताबिक दक्षिण बिहार के शहरी क्षेत्रों में अब तक 30,740 घर इस योजना के तहत रूफटॉप सोलर से जुड़ चुके हैं।
इन घरों में लगाए गए सोलर सिस्टम से करीब 108.58 MW क्षमता की बिजली उत्पादन व्यवस्था तैयार हुई है। रूफटॉप सोलर के विस्तार से घरेलू उपभोक्ताओं के बिजली खर्च को कम करने के साथ ग्रिड पर दबाव घटाने में भी मदद मिल सकती है।
6.1 GWh ऊर्जा भंडारण का लक्ष्य
बिहार की योजना सिर्फ सौर पैनल लगाने और बिजली उत्पादन बढ़ाने तक सीमित नहीं है। रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी 2025 के तहत वर्ष 2029-30 तक करीब 23.968 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के साथ करीब 6.1 GWh यानी 6,100 MWh ऊर्जा भंडारण क्षमता विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है।
ऊर्जा भंडारण इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि सौर ऊर्जा का उत्पादन मुख्य रूप से दिन के समय होता है, जबकि बिजली की मांग शाम और रात में भी बनी रहती है। ऐसे में दिन में पैदा हुई अतिरिक्त बिजली को बैटरी या पंप्ड स्टोरेज में सुरक्षित रखकर जरूरत के समय इस्तेमाल किया जा सकता है।
बिहार के सामने बड़ी चुनौती
बिहार के सामने अब चुनौती केवल नई सौर परियोजनाओं की घोषणा करने की नहीं, बल्कि उन्हें तय समय पर जमीन पर उतारने की भी है। मौजूदा करीब 1.92 GW सौर क्षमता और 2029-30 तक 23.968 GW नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के लक्ष्य के बीच बड़ा अंतर है। इसे कम करने के लिए बड़े सोलर पार्क, रूफटॉप सोलर, सरकारी भवनों का सोलराइजेशन, कृषि फीडरों का सोलराइजेशन और निजी निवेश को एक साथ गति देनी होगी।
बिजली की बढ़ती मांग को देखते हुए उत्पादन क्षमता के साथ ट्रांसमिशन और वितरण नेटवर्क को मजबूत करना भी जरूरी होगा। आने वाले वर्षों में बिहार में सौर ऊर्जा, ऊर्जा भंडारण और ग्रीन एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर के विस्तार पर जोर रहने की संभावना है। सरकार की निवेश योजना और निजी क्षेत्र की भागीदारी के जरिए राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता बढ़ाने की दिशा में काम किया जा रहा है।
