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मधुबनी में कलेक्ट्रेट की जमीन की नीलामी का आदेश, मुख्य गेट पर चस्पा हुआ कोर्ट का नोटिस; जानिए क्या है पूरा मामला

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डेस्क : बिहार के मधुबनी में कलेक्ट्रेट भवन से जुड़ी जमीन की नीलामी को लेकर एक बार फिर मामला चर्चा में है। मधुबनी व्यवहार न्यायालय की ओर से बिक्री उद्घोषणा जारी की गई है। इसके बाद कलेक्ट्रेट परिसर और प्रशासनिक महकमे में इस मामले को लेकर चर्चा तेज हो गई है।

मधुबनी व्यवहार न्यायालय ने मध्यस्थता निष्पादन वाद संख्या 03/2016 में दीवानी प्रक्रिया संहिता के आदेश 21 के नियम 66 के तहत बिक्री उद्घोषणा जारी की है। इसके तहत नगर मौजा स्थित खेसरा संख्या 4899 की जमीन को नीलामी के लिए चिह्नित किया गया है। इस जमीन के एक हिस्से पर कलेक्ट्रेट का दो मंजिला भवन बना हुआ है।

कितनी जमीन की होगी नीलामी?

न्यायालय की बिक्री उद्घोषणा के मुताबिक करीब 10 कट्ठा के भूखंड के दक्षिणी हिस्से में 2 कट्ठा 5 धुर 67 धुरकी जमीन पर दो मंजिला कलेक्ट्रेट भवन स्थित है। इस संपत्ति की चौहद्दी में उत्तर में नगर थाना, दक्षिण में व्यवहार न्यायालय, पूरब में सड़क और पश्चिम में न्यायालय परिसर बताया गया है।

न्यायालय ने इस संपत्ति का अनुमानित मूल्य और आरक्षित मूल्य 4 करोड़ 17 लाख 24 हजार 459 रुपये निर्धारित किया है। नीलामी में लगाई गई सबसे ऊंची बोली भी न्यायालय की बिक्री पुष्टि के बाद ही अंतिम मानी जाएगी।

क्या है पूरा मामला?

दरअसल, यह विवाद सीधे तौर पर कलेक्ट्रेट की जमीन से शुरू नहीं हुआ है। इसका संबंध पंडौल को-ऑपरेटिव सूत मिल से जुड़े पुराने बकाया विवाद से है।

मामला मेसर्स राधा कृष्णा एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड बनाम पंडौल को-ऑपरेटिव स्पिनिंग मिल्स प्राइवेट लिमिटेड से जुड़ा है। उपलब्ध रिपोर्टों के अनुसार, 1996-97 के दौरान पंडौल की सूत मिल को दोबारा चलाने के लिए कोलकाता की निजी कंपनी मेसर्स राधा कृष्णा एक्सपोर्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से समझौता हुआ था। कंपनी की ओर से मिल के लिए पूंजी और कच्चे माल के मद में करीब 28.90 लाख रुपये दिए गए थे। बाद में मिल बंद हो गई और भुगतान को लेकर विवाद पैदा हुआ।

मामला मध्यस्थता तक पहुंचा और कंपनी के पक्ष में भुगतान का आदेश हुआ। राशि का भुगतान नहीं होने के बाद वर्ष 2016 में मधुबनी जिला न्यायालय में निष्पादन वाद दायर किया गया। समय के साथ ब्याज समेत देय राशि बढ़कर करीब 4.17 करोड़ रुपये बताई गई।

2025 में भी चस्पा हुआ था नीलामी का नोटिस

इस मामले में यह पहली बार नहीं है जब मधुबनी कलेक्ट्रेट की जमीन और भवन की नीलामी का मुद्दा सामने आया हो। जून 2025 में भी कलेक्ट्रेट के मुख्य गेट पर न्यायालय का नोटिस चस्पा किया गया था। उस समय कोर्ट ने बकाया राशि का भुगतान करने के लिए 15 दिनों का समय दिया था और भुगतान नहीं होने की स्थिति में जमीन और भवन की नीलामी की कार्रवाई की बात कही गई थी।

अब 2026 में न्यायालय की ओर से बिक्री उद्घोषणा जारी होने के साथ नीलामी की प्रक्रिया एक और चरण में पहुंचती दिखाई दे रही है।

क्या पूरा कलेक्ट्रेट भवन बिक जाएगा?

यहां एक महत्वपूर्ण बात समझना जरूरी है। उपलब्ध न्यायालयीय बिक्री उद्घोषणा के अनुसार पूरे मधुबनी कलेक्ट्रेट परिसर को नीलामी के लिए चिह्नित किए जाने की बात नहीं है। नीलामी के लिए खेसरा संख्या 4899 की जमीन के निर्धारित हिस्से को चिह्नित किया गया है, जिस पर कलेक्ट्रेट का दो मंजिला भवन बना हुआ है।

यानी खबर को इस रूप में समझना अधिक सही होगा कि बकाया राशि की वसूली के लिए न्यायालय ने कलेक्ट्रेट भवन से संबंधित जमीन और उस पर बने भवन की नीलामी की प्रक्रिया आगे बढ़ाई है।

आगे क्या होगा?

न्यायालय की बिक्री उद्घोषणा के बाद अब नीलामी की आगे की प्रक्रिया न्यायालय द्वारा निर्धारित नियमों और शर्तों के अनुसार होगी। संभावित बोलीदाताओं को संपत्ति के क्षेत्रफल, स्वामित्व, कब्जे, पहुंच, भार और अन्य संबंधित अभिलेखों की स्वयं जांच करने की सलाह दी गई है।

मामला इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि नीलामी के लिए चिह्नित संपत्ति पर वर्तमान में जिला प्रशासन से जुड़ा कलेक्ट्रेट भवन मौजूद है। ऐसे में अब आगे की न्यायिक प्रक्रिया और प्रशासनिक स्तर पर होने वाली कार्रवाई पर सबकी नजर रहेगी।

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