पटना/नई दिल्ली : बिहार में करीब 288 लोगों के बैंक खातों में लगभग 150 करोड़ रुपये के संदिग्ध लेनदेन का मामला सामने आने के बाद विदेशी फंडिंग के कथित नेटवर्क को लेकर सवाल उठ रहे हैं। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, जांच में पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े कथित फंड फ्लो तथा नेपाल के रास्ते धन के आने-जाने के पैटर्न की भी पड़ताल की जा रही है।
क्या है पूरा मामला?
रिपोर्ट के अनुसार, बिहार के अलग-अलग इलाकों से जुड़े करीब 288 बैंक खातों में लगभग 150 करोड़ रुपये के लेनदेन की जानकारी जांच के दायरे में आई है। अधिकारियों की नजर खास तौर पर इस बात पर है कि रकम का स्रोत क्या था, पैसा किन माध्यमों से बिहार पहुंचा और खाताधारकों तथा अंतिम लाभार्थियों के बीच क्या संबंध है।
मामले में पाकिस्तान और बांग्लादेश से जुड़े संभावित वित्तीय स्रोतों के साथ-साथ नेपाल के रास्ते होने वाले लेनदेन की भी जांच की बात सामने आई है। हालांकि, उपलब्ध रिपोर्टों के आधार पर यह कहना जल्दबाजी होगी कि पूरी 150 करोड़ रुपये की राशि सीधे पाकिस्तान या बांग्लादेश से बिहार पहुंची थी।
विदेशी फंडिंग का ‘पैटर्न’ क्या है?
जांच का महत्वपूर्ण पहलू कथित तौर पर लेनदेन के तरीके से जुड़ा है। ऐसे मामलों में जांच एजेंसियां यह देखती हैं कि रकम सीधे विदेश से बैंक खाते में आई या फिर कई स्तरों और तीसरे देशों के माध्यम से भारत पहुंची।
भारत में पाकिस्तान से सीधे वित्तीय लेनदेन पर कड़े प्रतिबंध हैं। अगस्त 2025 में Reuters ने रिपोर्ट किया था कि RBI ने बैंकों और वित्तीय संस्थानों को पाकिस्तान से अप्रत्यक्ष रूप से आने वाले फंड की अतिरिक्त जांच करने को कहा था। रिपोर्ट में इसे संभावित हथियार-वित्तपोषण के जोखिम से जोड़कर बताया गया था।
इस वजह से third-country routing, हवाला और संदिग्ध बैंकिंग लेनदेन जैसे पहलू जांच में महत्वपूर्ण हो जाते हैं।
नेपाल का एंगल क्यों महत्वपूर्ण है?
बिहार की नेपाल के साथ लंबी खुली सीमा है। सीमा की भौगोलिक स्थिति और दोनों देशों के बीच आवागमन के कारण सुरक्षा एजेंसियां सीमा पार होने वाले वित्तीय और अन्य संदिग्ध नेटवर्क पर लगातार नजर रखती हैं।
हालांकि, किसी विशेष व्यक्ति, संस्था या खाते को विदेशी फंडिंग नेटवर्क से जोड़ने के लिए केवल लेनदेन का पैटर्न पर्याप्त नहीं होता। इसके लिए बैंकिंग रिकॉर्ड, धन के वास्तविक स्रोत, लाभार्थी और लेनदेन के उद्देश्य की जांच जरूरी होती है।
क्या यह आतंकवाद या अवैध गतिविधियों की फंडिंग है?
अभी इस निष्कर्ष पर सीधे पहुंचना उचित नहीं होगा। किसी खाते में विदेश से संदिग्ध रकम पहुंचना अपने आप में यह साबित नहीं करता कि उसका इस्तेमाल आतंकवाद या किसी गैरकानूनी गतिविधि के लिए किया गया।
जांच एजेंसियों को यह स्थापित करना होगा कि पैसा कहां से आया, किसके निर्देश पर भेजा गया, किस उद्देश्य से इस्तेमाल हुआ और क्या किसी कानून का उल्लंघन हुआ।
भारत में मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकवाद के वित्तपोषण को रोकने के लिए बैंकों पर KYC तथा संदिग्ध लेनदेन की निगरानी जैसी व्यवस्थाएं लागू हैं।
बिहार के लिए क्यों अहम है मामला?
बिहार की भौगोलिक स्थिति इसे इस तरह की जांच के लिए संवेदनशील बनाती है। राज्य की नेपाल सीमा के साथ-साथ बड़े पैमाने पर बैंकिंग और प्रवासी आय का नेटवर्क भी है। इसलिए किसी भी बड़े संदिग्ध वित्तीय लेनदेन की जांच में वैध remittance और अवैध fund routing के बीच अंतर करना बेहद महत्वपूर्ण है।
इस मामले में आगे की जांच से यह स्पष्ट हो सकता है कि 150 करोड़ रुपये की राशि का वास्तविक स्रोत क्या था और इसका अंतिम इस्तेमाल कहां हुआ।
