नालंदा: जिले से अधिकाधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के उद्देश्य से रविवार को राजाकुआं स्थित एसपी वर्मा महाविद्यालय में ‘साझी विरासत’ के बैनर तले बुद्धिजीवियों और समाजसेवियों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में 31 अक्टूबर को पटना के श्रीकृष्ण सिंह मेमोरियल हॉल में आयोजित होने वाले सरदार वल्लभभाई पटेल जयंती समारोह की तैयारियों पर चर्चा की गई। इस दौरान सामाजिक एकता, राष्ट्रीय अखंडता और साझा सांस्कृतिक विरासत को मजबूत करने पर जोर दिया गया।
बैठक में वक्ताओं ने समारोह को सफल बनाने के लिए रणनीति तैयार की। सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि नालंदा के राजाकुआं सहित आसपास के क्षेत्रों से अधिकाधिक लोगों को समारोह में शामिल होने के लिए प्रेरित किया जाएगा। इसके लिए जनसंपर्क अभियान चलाने और लोगों के बीच आपसी समन्वय बढ़ाने पर सहमति बनी।
साझा विरासत को बताया सामाजिक पहचान का आधार
प्रोफेसर सच्चिदानंद प्रसाद वर्मा ने कहा कि साझा विरासत भारत की सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान का आधार है। समाज के विभिन्न वर्गों को सम्मान और समानता के साथ जोड़कर ही मजबूत राष्ट्र का निर्माण किया जा सकता है। उन्होंने सामाजिक विभाजन से बचने और संवाद, सौहार्द तथा एकता को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
संजय मेहता ने कहा कि सरदार वल्लभभाई पटेल ने देशी रियासतों के एकीकरण के माध्यम से मजबूत राष्ट्र की नींव रखी थी। उनके विचारों से प्रेरणा लेकर आज सामाजिक एकता को मजबूत करने की जरूरत है। उन्होंने जाति, धर्म, भाषा और क्षेत्र की संकीर्ण सीमाओं से ऊपर उठकर साझा विरासत की रक्षा करने की अपील की।
युवाओं को शिक्षा और रोजगार से जोड़ने पर जोर
बैठक की अध्यक्षता कर रहे समाजसेवी शिव कुमार कुशवाहा ने कहा कि संगठित समाज ही अपनी समस्याओं का प्रभावी समाधान कर सकता है। युवाओं को शिक्षा, रोजगार और सामाजिक जिम्मेदारियों से जोड़कर जागरूक समाज का निर्माण करना आवश्यक है।
समाजसेवी भारत भूषण ने कहा कि सरदार पटेल को सच्ची श्रद्धांजलि उनके एकता और राष्ट्रनिर्माण के संदेश को सामाजिक जीवन में अपनाकर ही दी जा सकती है। उन्होंने साहित्य, संस्कृति और शिक्षा को समाज को जोड़ने का प्रभावी माध्यम बताया।
राष्ट्रीय एकता और भाईचारे का संदेश
बैठक का संचालन कर रहे समाजसेवी संजय कुशवाहा ने कहा कि समाज की सबसे बड़ी ताकत उसकी एकजुटता है। वहीं, अधिवक्ता कल्याण कुमार ने सरदार पटेल को राष्ट्रीय एकता और दृढ़ संकल्प का प्रतीक बताते हुए उनके विचारों को व्यवहार में उतारने की अपील की।
वक्ताओं ने एक स्वर में कहा, “नफरत नहीं, संवाद चाहिए; विभाजन नहीं, एकता चाहिए और संकीर्णता नहीं, साझी विरासत चाहिए।”
बैठक के अंत में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक सौहार्द और भाईचारे के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। साथ ही 31 अक्टूबर को पटना में होने वाले समारोह में नालंदा से अधिकाधिक लोगों की भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए जनसंपर्क अभियान चलाने पर सहमति बनी।
