रोहतास : रोहतास के कोचस प्रखंड की रेडिया पंचायत स्थित रुपी गांव में किसान अब पारंपरिक खेती के साथ नकदी फसलों की ओर रुख कर रहे हैं। यहां दर्जनों किसानों ने स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की है। पिछले छह वर्षों से इस फसल की खेती कर रहे किसानों का कहना है कि स्ट्रॉबेरी उनकी आमदनी बढ़ाने में मददगार साबित हो रही है। बेहतर उत्पादन और बाजार मिलने पर किसान इससे अच्छी कमाई कर सकते हैं।
छह साल से स्ट्रॉबेरी की खेती कर रहे किसान
रुपी गांव की फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी से जुड़े किसानों ने काला गेहूं और बटन मशरूम की खेती में अनुभव हासिल करने के बाद स्ट्रॉबेरी की खेती शुरू की। अब यह फसल उनके लिए कमाई का नया विकल्प बन रही है। किसानों के मुताबिक, एक हेक्टेयर में स्ट्रॉबेरी की खेती करने पर करीब 3 से 4 लाख रुपये की लागत आती है।
4 लाख की लागत, 12 लाख रुपये तक के उत्पादन का दावा
फार्मर प्रोड्यूसर कंपनी के CEO और किसान अशोक कुमार ने बताया कि उन्होंने स्ट्रॉबेरी की खेती का विशेष प्रशिक्षण लिया है। उनके अनुसार, एक हेक्टेयर में करीब 3 से 4 लाख रुपये खर्च करके लगभग 12 लाख रुपये मूल्य की स्ट्रॉबेरी का उत्पादन हो सकता है। लागत और अन्य खर्चों को घटाने के बाद सालाना 7 से 8 लाख रुपये तक की कमाई होने का दावा है। हालांकि, वास्तविक मुनाफा उत्पादन, बाजार भाव और खेती पर होने वाले खर्च पर निर्भर करता है।
दूसरे जिलों के किसान भी सीख रहे स्ट्रॉबेरी की खेती
रुपी गांव में स्ट्रॉबेरी की खेती अब दूसरे इलाकों के किसानों को भी आकर्षित कर रही है। बिहार के विभिन्न जिलों के अलावा दूसरे राज्यों से भी किसान अशोक कुमार के खेतों पर पहुंच रहे हैं। यहां वे पौधों की रोपाई, फसल की देखभाल और बाजार में बिक्री के तरीके सीख रहे हैं, ताकि अपने खेतों में भी इस नकदी फसल की खेती कर सकें।
महाबलेश्वर से मंगाए जाते हैं स्ट्रॉबेरी के पौधे
अशोक कुमार के अनुसार, स्ट्रॉबेरी की खेती के लिए महाराष्ट्र के महाबलेश्वर स्थित नर्सरी से पौधे मंगाए जाते हैं। उनके मुताबिक, लाल बलुई और काली मिट्टी में भी इसकी खेती की जा सकती है। 15 सितंबर से 31 अक्टूबर के बीच पौधों की रोपाई करना उपयुक्त माना जाता है। हालांकि, मौसम और खेत की परिस्थितियों के अनुसार उत्पादन में अंतर हो सकता है।
एक पौधे से 700 से 900 ग्राम तक फल मिलने का दावा
किसान अशोक कुमार ने बताया कि एक स्ट्रॉबेरी के पौधे से लगभग 700 से 900 ग्राम तक फल मिल सकता है। शुरुआत में किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए मंडियों और बाजारों की तलाश करनी पड़ती थी। अब पटना, रांची और कोलकाता के व्यापारी खेतों से ही स्ट्रॉबेरी खरीदने पहुंच रहे हैं। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में सुविधा मिल रही है।
स्ट्रॉबेरी की खेती से किसानों को नई उम्मीद
रुपी गांव में स्ट्रॉबेरी की खेती किसानों के लिए आमदनी बढ़ाने का नया रास्ता बन रही है। उचित देखभाल, बेहतर उत्पादन और बाजार में अच्छी कीमत मिलने पर यह फसल किसानों की आर्थिक स्थिति मजबूत कर सकती है। यही वजह है कि अब क्षेत्र के अन्य किसान भी पारंपरिक खेती के साथ स्ट्रॉबेरी उगाने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
